यतीम वो नहीं होता जिसके माँ बाप नहीं होते , यतीम वो होता है जिसके पास इल्म नहीं होता – अली अब्बास

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

बाराबंकी  । यतीम वो नहीं होता जिसके माँ बाप नहीं होते , यतीम वो होता है जिसके पास इल्म नहीं होता ।यह बातअस्करी नगर स्थित शुजा हुसैन के आवास पर मजलिस को सम्बोधित करते हुए ज़ाकिरे अहले बैत अली अब्बास ने कही । उन्होने यह भी कहा कि नमाज़ इबादत का सबसे अच्छा हिस्सा है, लेकिन मक़्सदे जिन्दगी नहीं ।नमाज़ को रस्मन व आदतन  न पढ़ो बल्कि अल्लाह को समझ कर पढ़ो, अल्लाह को  समझना है तो इल्म हासिल करो ।ताकि गुमरही का शिकार न हो सको।आखिर में कर्बला वालों के मसायब बयान किये , जिसे सुनकर मोमनीन रोने लगे ।मजलिस से पहले डा 0 रज़ा मौरान्वी ने अपना कलाम पढ़ा – मेरे मकान में फर्शे अज़ा बिछा हुआ है, गरीब खाना भी दौलत कदा बना हुआ है ।शारिक़ उन्नावी ने अपना कलाम पढ़ा- नेज़े पे पढ़ रहा है जो अल्लाह का कलाम , हर अम्बिया की जान उसी एक सर में है  ।अजमल किन्तूरी नेअपना कलाम पढ़ा-किसने  पानी  से कर दिया रौशन  , अब अंधेरों को खल रहा है चराग।आरिज़ जर्गावीं ने अपना कलाम पढ़ा- दुनियां समझ ना पाई तेरा क्या मक़ाम है,बस इतना जानती है केअब्बास नाम है ।मुहिब रिजवी  ने अपना बेहतरीन कलाम पढ़ा – ज़बान ओ लब मे नहीं जुरअते नफ़स में नहीं, तेरा खयालों के दस्तरस में नहीं । मो0 मेहदी  नक़वी ने अपना कलाम पढ़ा-मुतमइन  होने लगा है दिल  इसी उम्मीद पर,कब दुआए अल अजल का तर्जुमा हो जायेगा । सरवर अली कर्बलाई नेअपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – उसको वजूद ए दीन  ए रसूल ए खुदा कहो, बाक़ी है जिससे दीन उसे करबला कहो  । मजलिस का अगाज़ हदीस ए किसा पढ़कर शुजा हुसैन ने  किया ।शुजा हुसैन ने मजलिस में आए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया ।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

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