नही रहे हकीम हाजी अली

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

जैदपुर बाराबंकी। दूसरो को जिन्दगी देने वाले आखिर खुद जिन्दगी छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कस्बे के हकीम हाजी अली अहमद की अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सूचना मिलते ही क्षेत्र मे शोक की लहर दौड़ गयी। जानकारी के अनुसार मोहल्ला मोलवी कटरा निवासी उसतदुश शोअरा हाजी अली अहमद बीती रात एक मंगनी के कार्यक्रम मे रूदौली गये थे। वापस लौट कर घर आये और परिवार के लोगों से घंटों बाते करते रहे।थोड़ी देर बाद अचानक सीने पर दर्द होने की जानकारी परिवार के लोगों को दिया। उपचार के लिये ले जाते समय मोहल्ला बाँध के पास उन्होंने आखरी सांस ली। बताते चले कि हाजी अली अहमद हड्डी को बैठाने एक नामचीन व्यक्ति थे हजारों की संख्या लोगो की टूटी-फूटी हड्डियों को जोडकर उसे अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। यहीं नहीं शायरी मे भी इनकी एक अलग पहचान है। सैकड़ो की संख्या में हाजी के शिष्य इनके लिखे कलाम के कारण देश मे ही नही विदेशों में भी नाम कमा चुके है। इनके शिष्य सफीर जैदपुरी द्वारा पढ़ा गया ये कलाम, कई वर्षो तक लोगों की जुबान व दिमाग मे गूजता रहा। दिल की धड़कन मे रहूँ। तेरी साँसों मे रहू। हाजी सायरो के उस्ताद होने के साथ पहलवानी के दाव पेंच मे भी बहुत माहिर थे। इन्सानो के मेल मुहब्बत से पेश आना इनकी आदत थी वहीं जानवरों की सेवा करना भी इनका शौक था। भेड़ ,दुम्बे बकरियों का पालन कर ईटों की सप्लाई कर परिवार को चलाने वाले की अचानक मौत हो जाने से कस्बे सहित ग्रामीण इलाकों भे भी लोगों मे शोक का माहोल बना हुआ है बाद नमाजे जुमा कस्बे की कदीमी कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। जहां सफीर जैदपुरी, राशिद कमाल, जमील अख्तर, इब्ने वफा, बसर, जैदपुरी, मरगूब, इसलामुददीन, राशिद आरफी, शोअराओ सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

 

 

 

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