झूठों ने हर दौर में सच्चों का बाईकाट  किया आज भी बाईकाट  करके अपने बुजुर्गों की पैरवी कर रहे हैं -मौलाना वसी हसन खान फातिमा ज़हरा स अ के चाहने जहन्नम में नहीं जा सकते

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

बाराबंकी । झूठों ने हर दौर में सच्चों का बाईकाट  किया आज भी झूठे बाईकाट  करके अपने बुजुर्गों की पैरवी कर रहे हैं । फातिमा ज़हरा स अ के चाहने जहन्नम में नहीं जा सकते । यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में वक़ार हैदर इब्ने ज़ुल्फेक़ार हैदर मरहूम और मरहूमा शगुफ्ता बानों की मज्लिसे बरसी के मौके पर मौलाना वसी हसन खान ने कही।मौलाना ने ये भी कहा कि अल्लाह ने फातिमा ज़हरा अता करके अपने हबीब को  नश्ले कसीर अता की ।कौसर से मुराद फातिमा ज़हरा स अ  हैं ।उन्होंने यह भी कहा कि दुनियां में सबसे अच्छा घर वो है जहां यतीमों के साथ अच्छा बर्ताव किया जाये ।आखिर में बीबी ज़हरा व कर्बला वालों के मसायब पेश किये । मजलिस से पहले डॉ 0 रज़ा मौरान्वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा – ज़ुल्म का खाब किसी हाल न पूरा होगा ,आसतीं आज तोअसगर भी चढाए हुये हैं ।अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुये पढ़ा – न खौफ़े मर्ग न जीना मोहाल होता है , यही तो इश्के अली का कमाल होता है । बाक़र नक़वी ने पढ़ा – वहां पे अज़मते ज़हरा को कौन समझेगा , के जिस शहर में सभी बेशऊर रहते हैं । मुजफ्फर  इमाम ने पढ़ा – तेरी चादर में नबी आके सुकूं पाते थे , सारे आलम की अकेली है मसीहा ज़हरा ।माजिद जौनपुरी ने पढ़ा – अली का गुलाम गुलाम हूं मैं सवाब लेके मैं क्या करूंगा । बसी है दिल में अली की खुशबूगुलाब लेकर मैं क्या करूंगा । हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – हक़ बोलने से बाज़ न आएंगे हम कभी । चाहे यजीद ए वख़्त मेरा सर समेट ले । मुमकिन नहीं है शाह का ग़म हो सके रक़म । सरवर तख़य्युलात की चादर समेट ले ।इसके अलावा कामयाब सन्डीलवी , ज़ाकिर इमाम , गाजी इमाम , हादी हुसैन , मो0 हसन , मोहसिन इमाम ,हसन नक़वी , हुसैन नक़वी ने भी नज़रानए अक़ीदत पेश किया । हुसैन नक़वी ने तिलावते कलाम ए इलाही से मजलिस का आगाज़ किया ।अन्जुमन गुन्चये अब्बासिया ने नौहाखानी व सीनाजनी की ।बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया ।

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