वो मोमिन मोमिन  नहीं हो सकता जो दूसरों की बुराई करता है  इल्म के साथ ईमान इत्तेहाद और दौलत की  क़ूवत जितना हो सके  उतना  हासिल करो

 इज़्ज़त सरबलंदी और गलबा चाहिये तो  क़ूवत हासिल करो मोमिन की इज़्ज़त काबे से बढकर होती है

 दौलत की क़ूवत हासिल हो जाये तो वाल्दैन व अपने करीबी रिस्तेदारों व पडोसियों की इज़्ज़त बढाने में खर्च करो दीन की बुनियाद तौहीद है, बगैर रसूल अल्लाह स अ व अहले बैत का ज़िक्र बे मानी है -मौलाना आगा अख्तर “जौन”

नादान दोस्त से दाना दुश्मन अच्छा होता है
गड़वारा प्रतापगढ़ । ज़िक्रे इलाही से कभी गाफ़िल न रहो। जितना हो सके क़ूवत हासिल करो ताकि दीन के मुताबिक अमल कर सको । नादान दोस्त से दाना दुश्मन अच्छा होता है ।दौलत की क़ूवत हासिल हो जाये तो वाल्दैन व अपने करीबी रिस्तेदारों व पडोसियों की इज़्ज़त बढाने में खर्च करो । यह बात इमाम बाड़ा मरहूम दिलावर अली गड़वारा प्रतापगढ़ में मज्लिसे चेहलुम बराए ईसाले सवाब मरहूमा ततहीर फातिमा बिन्ते शन्शाह अली को खिताब  करते हुए आली जनाब मौलाना आगा अख्तर “जौन” साहब ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि दीन की बुनियाद तौहीद है, बगैर रसूल अल्लाह स अ व अहले बैत का ज़िक्र बे मानी है ।मोमिन की इज़्ज़त काबे से बढकर होती है ।वो मोमिन मोमिन  नहीं हो सकता जो दूसरों की बुराई करता है इल्म के साथ ईमान इत्तेहाद और दौलत की  क़ूवत जितना हो सके  उतना  हासिल करो। इज़्ज़त सरबलंदी और गलबा चाहिये तो  क़ूवत हासिल करो । आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिस से पहले हाजी सरवर अली कर्बलाई ने पढ़ा -फ़ातिमा   ज़हरा  के  बेटों  की   वो मातम दार थी , हर    बुराई   से   हमेशा   के  लिये बेज़ार  थी । छोड़कर   दुनियां   सूए  ज़हरा  गयी ततहीर भी, क्यों न हो दुनियां में वो ज़हरा की खिदमत गार थी । ज़मीर अली ज़ैदी ने पढ़ा -हुर को शब्बीर ने क्या रन की  इजाज़त देदी, नार को नूर किया और शहादत देदी।क्या सखावत है हुसैन इब्ने अली की वल्लाह , जाम कौसर का दिया रहने को जन्नत देदी ।मौहम्मद आफताब आलम ने पढ़ा- न मोहब्बत न मोअद्दत न विला मांगी है,  न फज़ायल न फज़ीलत न सना मांगी है । सुल्तान ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया ।मजलिस का आगाज़ तिलावते कलामे इलाही से हुआ । बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया ।
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