बहुत सारे गम और दर्द दे गया साल 2021

एसएम न्यूज़24टाइम्स जिला ब्यूरो के साथ नेवाज अंसारी की रिपोर्ट 7268941211

देवा, बाराबंकी। साल 2021 कुछ इस तरह बीता मानव लोगों के ऊपर पहाड़ टूट पड़ा हो। इस साल के 2 महीने अप्रैल और मई सभी के लिए बहुत भारी साबित हुए। इन 2 महीनों में हमने बहुत कुछ खोया और सीखा। अब इस दुआ के साथ आने वाले साल में कदम रख रहे हैं कि ईश्वर हमको वह दिन दोबारा ना दिखाए। 21वीं सदी का दूसरा दशक यानी साल 2021 कोरोनावायरस जैसी घातक बीमारी के खतरे से शुरू हुआ। लेकिन लोगों के लिए टीके के रूप में एक बहुत बड़ी उम्मीद लेकर आया। 26 जनवरी से देश में वैक्सीन लगनी शुरू हो गई थी और कुछ पल के लिए ऐसा लगा कि कोरोनावायरस संक्रमण घट चुका है ।लेकिन होली के त्यौहार में आम लोगों ने खूब हल्ला गुल्ला मचाया और देशभर में चुनावी रैलियां चल रही थी। तब सभी लोगों को ऐसा महसूस होने लगा कि हम कोरोना जैसी बीमारी से सुरक्षित हो गए हों। लेकिन ईश्वर को यह मंजूर नहीं था कि अचानक हालात कुछ इस तरह बदल गए। अप्रैल और मई के 2 महीने में ऐसी तबाही आई कि लोगों को बहुत दर्दनाक मंजर से गुजारना पड़ा। दवाओं की महामारी, अस्पताल में विस्तार की कमी और ऑक्सीजन की कमी से मौत की बेबसी हमने झेली। कई हजार परिवारों ने अपनी आंखों के सामने अपनों को खो दिया। ना जाने कितनी औरतों के सुहाग उजड़ गए। किसी ने माँ को खोया, किसी ने बेटा खोया, तो किसी ने भाई, और तो और हमने भी इस कोरोना काल मे अपने भाईजान को खो दिया।छोटे-छोटे मासूम बच्चे यतीम हो गए ।किसी के तो पूरे-पूरे परिवार ही ख़त्म हो गए।तो कई लाख लोगों ने मौत की दहशत को बेहद नजदीक से महसूस किया। कुल मिलाकर 2021 एक चिकित्सा आपातकाल के रूप में गुजरा है। करोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण देश के लोगों को सांसो का संकट झेलना पड़ा। सही समय पर ऑक्सीजन न मिलने से बहुत सारे लोगों की जानें चली गई। गूगल सर्च रिपोर्ट का दावा है कि भारतीयों ने सबसे ज़्यादा इस जानकारी को इंटरनेट पर खोजा है कि घर मे ऑक्सीजन किस तरह तैयार की जा सकती है।जिससे समय पर लोगों की जान बचाई जा सके। कोरोना की दूसरी लहर का कहर लोग झेल चुके हैं ।अब देश के सामने तीसरी लहर की आशंका मुंह बाए खड़ी है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीसरी लहर आ रही है तो यह कितनी खतरनाक होगी। कोविड सुपर मॉडल पैनल का अनुमान है कि देश में ओमीक्रोन वेरिएंट के चलते अब तीसरी लहर आ सकती है, और फरवरी 2022 में यह चरम पर होगी।देश में 20 दिन के भीतर ही इस वेरिएंट से संक्रमित मरीज़ 12 से अधिक राज्यों में मिल चुके हैं। अब सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि दूसरी लहर के दौरान सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले महाराष्ट्र, दिल्ली में ही इस वेरिएंट के सबसे ज़्यादा मरीज़ हैं।इस बीच दिल्ली ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वे बूस्टर डोज़ पर जल्द से जल्द फैसला लें।बूस्टर डोज़ की ज़रूरत के बारे में भारतीय वैज्ञानिक ने भी अपनी राय देते हुए कहा है कि इस बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

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