पंचतत्व में विलीन हुए संुदर लाल, बेटे पंकज ने दी मुखाग्नि
मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता दरियाबाद बाराबंकी।7874257456
बाराबंकी। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक पंडित सुंदर लाल दीक्षित का शनिवार को असमायिक निधन हो गया। वह करीब 74 साल के थे। उनके निधन की खबर से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की खबर सुनते ही सभी राजनैतिक दलों के लोग हैदरगढ़ स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। देर शाम स्व सुंदर लाल दीक्षित के पैतृक निवास ग्राम दौलतपुर में गार्ड आफ आर्नर दिया गया। उसके उपरान्त उनके पुत्र उनके पुत्र पंकज दीक्षित ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। गौरतलब है कि पूर्व विधायक और लोकतंत्र सेनानी स्व सुंदर लाल दीक्षित का लखनऊ के डा राममनोहर लोहिया अस्पताल में शनिवार की सुबह निधन हो गया था। वह 75 वर्ष के थे। भाजपा नेता सुंदर लाल दीक्षित प्रतिदिन की भांति शनिवार की सुबह अवसानेश्वर महादेव के मंदिर पूजा अर्चना के लिए गए थे। जहां से वह वापस हैदरगढ़ स्थित अपने आवास पर आए। जहां सीढी से गिरने से उनके सिर पर गहरी चोंट आई और इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया। स्व दीक्षित के निधन की खबर आग की तरह पूरे जिले में फैल गई। सुबह राज्यमंत्री सतीश शर्मा, हैदरगढ़ विधायक दिनेश रावत सहित भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता हैदरगढ़ में जुटने शुरू हो गए। पार्थिव शरीर के हैदरगढ़ पहुंचे ही हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इस मौके पर पूर्व विधायक सरवर अली खान, समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा, पत्रकार कृष्ण कुमार द्विवेदी ‘राजू भैया‘, पाटेश्वरी प्रसाद, भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक कुशुमेश, जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष शिवशंकर शुक्ला, नगर पंचायत हैदरगढ के पूर्व डिप्टी चेयरमैन मोहम्मद सरवर सिद्दीकी, पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप, सदर विधायक सुरेश यादव, पूर्व सांसद रामसागर रावत, पूर्व विधायक राममगन रावत, पूर्व विधायक राम गोपाल रावत, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव, सुनील सिंह, प्रेमा अवस्थी सहित हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
मीसा बंदी थे सुंदर लाल दीक्षित
वयोवृद्ध समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने बताया कि सुंदर लाल दीक्षित ने प्रजा सोषलिस्ट पार्टी से राजनीति की शुरूआत की। वह आपातकाल में बंदी बनाए गए। उन्हें बाराबंकी और फैजाबाद कारागार में रखा गया। छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने के बाद सुंदर लाल दीक्षित ने 1977 में हैदरगढ से स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जिसने उन्हें राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ा। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में दो बार विधानसभा का चुनाव जीते। आपातकाल की समाप्ति के बाद वह भाजपा में चले गए। फिर दो बार भाजपा से विधायक चुने गए। उन्होंने हमेशा अन्याय और शोषण का प्रतिकार किया। यही उनकी पहचान थी। मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता दरियाबाद बाराबंकी।7874257456

