दीन चाहिए तो मारेफ़त हासिल करो – मौलाना इब्ने अब्बास ” दीन के आइडियल रसूल व आले रसूल की मारेफ़त हासिल किए बिना दीन मुमकिन नहीं “
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी
बाराबंकी । दीन के आइडियल रसूल व आले रसूल की मारेफ़त हासिल किए बिना दीन मुमकिन नहीं । दीन चाहिए तो मारेफ़त हासिल करो । यह बात महफ़िल ए मसर्रत को ख़िताब करते हुए आली जनाब मौलाना इब्ने अब्बास साहब ने कहा। मौलाना ने यह भी कहा कि अक़्द करना सुन्नते नबी है और अक़्द पढ़ना सुन्नते अबू तालिब है । अल्लाह ने जनाबे ख़तीजा और जनाबे अबू तालिब के एहसान का बदला ऐसा चुकाया कि जनाबे ख़तीजा को जनाबे फ़ातिमा जैसी बेटी अता किया और जनाबे अबू तालिब को हज़रत अली जैसा बेटा अता किया । यही नहीं क़यामत तक के लिये एक ऐसा वारिस अता किया जो परदये ग़ैब में है । जो जनाबे ख़तीजा और जनाबे अबू तालिब दोनों ही का वारिस है । महफ़िल ए मसर्रत में नज़रानये अक़ीदत पेश करते हुए डा.रज़ा मौरान्वी ने पढ़ा – हम जो ज़हरा तेरी अज़मत को बताने लग जाएं , लोग दांतों तले उंगली दबाने लग जाए । अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- इस लिए हर लफ्ज़ मिदहत का अजी़मुश्शान है , फा़तिमा ज़हरा मेरी तहरीर का उनवान है । मुहिब रिज़वी ने पढ़ा – भटकी ना फ़िक्र फिर कभी मदहे नबी के बाद , जाती कहां यह मुफ़लिसी शहर ए सख़ी के बाद ।ज़ैग़म अली ने पढ़ा – माबूद यह शिफ़त तो फ़क़त तेरी शान है , महसूस भी हो और दिखाई न दे मुझे ।आरिज़ जरगांवीं ने पढ़ा – तख़य्युलात के फ़ितरूश को बालो पर देकर, अक़ीदतों को फ़लक पर बिठाने वाले हैं ।हाजी सरवर अली करबलाई ने पढ़ा – जिसमें ख़िलकत का तेरी राज़ निहां था ज़हरा , दे दिया रब ने मोहम्मद को वो तोहफ़ा ज़हरा । हश्र में बस वही पाएंगी शिफ़ाअत ख़ातून,अपने किरदार में जिसनें तुझे ढाला ज़हरा । साज़ी मेहदी ने पढ़ा – उनके आने से हमें ये फ़ायदा हो जाएगा, कौन हक़ है कौन बातिल फ़ैसला हो जाएगा । इसके अलावाआसिफ अख्तर बाराबंकवी, सलीम काज़मी, अमान काज़मी,ज़ईम काज़मी व अयान क़ाज़मी ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया।बानिये महफ़िल ने सभी का शुक़्रिया अदा किया।आग़ाज तिलावत ए कलाम पाक से अयान ने किया।निज़ामत के फ़रायज़ अजमल किन्तूरी साहब ने अंजाम दिया ।
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