हैदरगढ़ बाराबंकी। वन विभाग क्षेत्र में प्रतिवर्ष जितने पौधों का रोपण सरकार के निर्देश पर करता है उससे ज्यादा पेड़ साल भर में वन विभाग के रहमोकरम पर वन माफिया काट ले जाते हैं। हरे भरे प्रतिबंधित पेड़ों की कटान का काम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे पर्यावरण संतुलन तो बिगड़ेगा ही आने वाली पीढियां को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसका ताजा उदाहरण देखना हो तो जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों को हैदरगढ़ व त्रिवेदीगंज ब्लॉक का स्थलीय मुआयना करना चाहिए। हैदरगढ़ क्षेत्र के सतरही गांव में बीती रात वन माफिया किसान राम निहोरे के तीन गूलर के हरे-भरे पेड़ काट लिए गए, वहीं तीन दिन पहले इसी गांव में सफीक नाम के एक पेशेवर ठेकेदार ने एक औषधीय पेड़ नीम दो जामुन वन कर्मियों की मिली भगत से काटकर रातों-रात गायब कर दिया । यही नहीं उनके ठूंठों को पुलाव लगाकर उन्हें जला दिया गया ताकि पेड़ काटने के निशानी मिट जाए। इसी तरह 3 दिन पहले इसी क्षेत्र में एक शातिर बन माफिया अनूप सिंह सरांय पुकार में हरे भरे दो पेड़ आम व चार पेड़ गूलर के काट कर जेसीबी से ठूंठ सहित लकड़ी ले जाने में कामयाब रहा । इसी क्रम में सरांय चौबे में बीती रात दो पेड़ गूलर के काट कर रातों-रात गायब कर दिए गए। यह तो सिर्फ वानगी है त्रिवेदीगंज, हैदरगढ़ व सुबेहा क्षेत्र में वन माफियाओं ने पूरी तरह से डेरा डाल दिया।कभी कभार यह लकड़कटे किसी वन प्रेमियों की शिकायत से पकड़े भी जाते हैं तो वन विभाग इन्हें हजार दो हजार की जुर्माने की रसीद थमा कर लकड़ी उनके हवाले कर दी जाती है। इस पर अंकुश लगाया जाना अब नितांत आवश्यक हो गया । इस पर विराम तभी लग सकता है जब तक जिला प्रशासन इसका संज्ञान नहीं लेता, तब तक यह सब खेल रुकने वाला नहीं है। फिलहाल प्रतिबंधित लकड़ी का कटान इन क्षेत्रों में अंधाधुंध चल रहा है, इसके जिम्मेदारों की लापरवाही साफ चुगली कर रही है कि कहीं ना कहीं इन लोगों की संलिपतिता इन अवैध कटानों में रहती है।
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