रामलीला मे कलाकारों द्वारा तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया।
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी। रामलीला समिति मसौली के तत्वावधान में चल रही रामलीला मे कलाकारों द्वारा तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया।
जनकपुर के राज दरबार में सीता स्वयंवर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे देश-देशांतर के राजा-महाराजाओं को आमंत्रित किया गया जिसमे राजा जनक का संदेश सुनकर सभी राजाओं द्वारा धनुष भंग करने के लिए अपना दम-खम दिखाते हुए असफल प्रयास किए गए। इससे राजा जनक बहुत दुखी हुए और विलाप करते हुए कहने लगे कि शायद धरती वीरों से विहीन हो गई है। अब सीता का विवाह किससे होगा। यह सुनते ही लक्ष्मण जी क्रोधित हो गए और राजा जनक से कहा कि महाराज शायद आपको यह ज्ञात नहीं है की आपकी सभा में सूर्यवंशी, रघुवंशी प्रभु श्रीराम बैठे हैं। आप ऐसा कहकर हमारे सूर्यवंश का अपमान कर रहे हैं, जो हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा। अंत में प्रभु श्रीराम जी के समझाने पर लक्ष्मण जी शांत हुए और गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम जी ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर झट से तोड़ दिया और देवलोक से देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा कर मंगलकामना की गई। इसी के साथ माता सीता ने प्रभु श्रीराम जी के गले में वरमाला पहनाई और लोगों ने सीताराम जी के देर तक जयकारे लगाए। वहीं यह जानकारी परशुराम को प्राप्त होते ही पूरे रामलीला मैदान में परशुराम की गर्जना से सन्नाटा पसर गया। इसके पश्चात लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने वहां उपस्थित लोगों को रोमांचित कर दिया। राजा जनक ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ को मिथिला आने के लिए निमंत्रण भेजा राजा दशरथ और उनके पुत्रों का मिथिला में स्वागत किया गया।इस मौके पर अध्यक्ष विपिन मौर्या उपाध्यक्ष प्रेमनन्द वर्मा कोषाध्यक्ष देवी शंकर सोनी कमलेश नाग उदित नारायण मौर्याअमित कुमार जामवंत मौर्या रामचरित वर्मा जसवंत मौर्या

