मनरेगा में गरीब मजदूरों के पेट पर लात मारकर चलाईं जा रही जेसीबी जिम्मेदार मौन

त्रिवेदीगंज, बाराबंकी।सभी सरकारी नियम कानून ताख पर रखकर जेसीबी मशीन तिलोकेश्वर तालाब में अवैध तरीके से गड़गड़ाने लगी। आखिर तालाब में किस काम के लिए जेसीबी चलवाई जा रही है इस सवाल का जवाब प्रधान से लेकर मनरेगा मेट व ग्राम रोजगार सेवक सहित ब्लाक तक का कोई कर्मी नहीं दे रहा। कुछ ग्रमीणों ने बताया कि इस तालाब को अमृत सरोवर के रूप में चयनित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।शायद इसीलिए बार बार जेसीबी मशीन टुकड़ों में कामकर रही है। इससे कुछ दिन पूर्व भी तालाब में जेसीबी मशीन खुदाई कर गढ्ढा बनाया था तो उस दौरान सैकड़ों मछलियाँ मर गई थी।वहीं ग्रामीणों ने यह भी कारण बताया कि तालाब के अगल बगल प्रधान की व उनके रिश्तेदारों की जमीनें हैं जिसके लिए मनमानी तरीकों से तालाब का मूल नक्शा व रक्बा बदलकर उन अपनी अपनी जमीनों का रक्बा बढ़ाने व उनके लिए रास्ता बनाने का कुचक्र रचकर जेसीबी मशीन चलवाई जा रही है।
यह पूरा मामला है विकासखण्ड क्षेत्र त्रिवेदीगंज की ग्राम पंचायत गौरवाउसमानपुर के मजरे तिलोकपुर स्थित तिलोकेश्वर तालाब का। सरकारी अभिलेखों में गाटा संख्या 107 तालाब रूप में दर्ज है। तालाब सुप्रसिद्ध तिलोकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण से सटा है। इस तालाब का वर्ष 2000 से अब तक पाँच प्रधानों तेज प्रकाश, ननकई, सन्तदीन,शशिकिरण व वर्तमान प्रधान इन्द्र कुमार ने लगभग पच्चीस लाख रूपये सुन्दरीकरण व रखरखाव के नाम पर खर्चा किए हैं।बावजूद इसके वर्तमान प्रधान द्वारा इसी तालाब को अमृतसरोवर के रूप में भी प्रस्तावित किया गया है। नियमानुसार तालाब सहित सभी प्रकार के काम गाँव में मनरेगा के तहत होने चाहिए पर यहाँ मनरेगा में गरीबों की रोजी रोटी को ठेंगे पर रखे जाने को प्राथमिकता दी गई।और खुदाई का काम जेसीबी मशीन से कराया जाने लगा।जबकि गाँव के मध्य स्थित तालाबों का कोई पुरसाहाल नहीं है।
तिलोकेश्वर तालाब से ही सटी उत्तर गाटा संख्या 108 व पूरब में गाटा संख्या104/05 खुद प्रधान व उनके रिश्तेदारों की जमीनें हैं। जिनके लिए कोई रास्ता नहीं है।उन जमीनों को वेशकीमती बनाने के लिए ही तिलोकेश्वर तालाब की जमीन का उपयोग अमृतसरोवर की रूप में खुदाई से पूर्व रास्ता बना लेने के लिए किया जा रहा है। इसी मंशा को पूरा करने के लिए ही शनिवार रात में अचानक जेसीबी मशीन तिलोकेश्वर तालाब में खुदाई कर पटाई करने के लिए उतार दी गई जो रविवार को भी चलती रही। शनिवार के दिन का चयन इसीलिए किया गया ताकि कोई अधिकारी रविवारीय छुट्टी के चलते गाँव नहीं पहुँच सकेगा।जब तक कोई कार्रवाई होगी तब तक रास्ते का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

Don`t copy text!