मनाया गया साहेब ख्याम दास का जन्मोत्सव

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

बाराबंकी। सत्यनाम पंथ चतुर्थ पावा के गद्दीनशीन साहेब ख्याम दास का जन्मोत्सव उनकी तपोवन मधनापुर धाम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समाधि स्थल पर लगी सत्यनाम पताका प्रवर्तन साहेब शेष नारायण दास और साधना स्थल पर पूजन के उपरांत प्रसाद भोजन भंडारा का आयोजन छोटे बाबा के द्वारा किया गया। अगहन कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को अवतरित हुए साहेब ख्याम दास में बाल्यावस्था से ही भक्ति के सूक्ष्म अंकुर विद्वान थे। उपयुक्त गुरु पाकर वह ज्ञान ज्योति प्रकाशित हो गई। सतनामी बनने से पूर्व ही कान्यकुब्ज ब्राह्मण कुल में जन्मे ख्याम दास साहेब ने घर परिवार आदि त्यागकर योग साधना के मार्ग को अपनाया और एक ब्रह्मचारी से दीक्षा ली थी। यही नहीं अन्न फलाहार आदि त्याग कर कुछ समय तक मिर्ची और नीम की पत्ती को ही आहार बनाया। कुछ समय तक पंचाग्नि की भी साधना की। इस प्रकार 12 वर्षों तक अन्न ग्रहण नहीं करके कठिन योग्य अभ्यास द्वारा ईश्वर प्राप्ति का प्रयत्न किया। किंतु हृदय को शांति ना मिली। इस समय संत जगजीवन दास की ख्याति निकटवर्ती प्रदेशों में फैल रही थी। मधनापुर से केवल 10 किलोमीटर उत्तर घाघरा के तट पर शरदहा गांव में संतों का मेला लगता था। एक दिन आप भी मिलने के लिए गए। संत श्री ने इनका बड़ा सत्कार किया। इनके योगाभ्यास की प्रशंसा की। ख्याम दास साहेब संत जगजीवन दास की अलौकिक प्रतिभा उदारता आदि देखकर मुग्ध हो गए और उनसे आग्रह करके दीक्षा प्राप्त किया। उपदेश ग्रहण करने के पश्चात अजपा जाप नाम साधना और सहज समाधि द्वारा शीघ्र ही आपने आत्मज्ञान प्राप्त कर लिया आपकी प्रमुख तीन रचनाएं है, काशीकाण्ड, तत्वसागर व दोहावली। साहेब ख्याम दास के प्रधान चार शिष्य हुए, अखलासी दास, बखतौरी दास, मौनी दास व शिवलाल दास। चूंकि आप ब्रह्मचारी थे इसलिए अपनी गद्दी का उत्तराधिकारी आपने पुरई दास साहेब को बनाया। उन्हीं के वंशज वर्तमान गद्दी पर महंत हैं।

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

 

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