बातिल के खिलाफ आवाज न उठाना भी बातिल की तरफ दारी होती है: मौलाना रजा

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

बाराबंकी। मौत भी एक नेमते खुदा है, खुदा अपने नेक बन्दों का इम्तेहान अपनी दी हुई नेमतों से लेता है।कभी देकर कभी लेकर ,कामयाब वही होता है जो मिलने पर शुक्र और चले जाने पर सब्र करता है।यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मज्लिसे तरहीम बराये ईसाले सवाब मौलाना सना अब्बास को किताब करते हुये मौलाना अली रजा साहब मुस्तफाबादी ने कही मौलाना ने यह भी कहा रजाए इलाही पर जिन्दगी बसर करने वाले मौत को भी नेमते खुदा समझते हैं। जो आखेरत को छोड़ दुनियां अपनाते हैं वही इम्तेहान ए खुदा से घबराते हैं। बातिल के खिलाफ आवाज न उठाना भी बातिल की तरफ दारी होती है। आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किये जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिससे पहले डॉ. रजा मौरान्वी ने पढ़ा -जिसके खूंने पाक से पैदा हुए हों बारह नूर, उसपे फतवा कुफ्र का है खाक होने की दलील। तुझको ईमाने अबू तालिब पे शक होने लगा, बस यही है तेरे नापाक होने की दलील। इसके अलावा मुजफ्फर इमाम, शुजा अब्बास वगैरा ने नजरानये अकीदत पेश किया। ओवैस नकवी मुस्तफाबादी व उनके साथियों ने सोजख्वानी पेश की। मीसम रजा ने मजलिस का आगाज तिलावते कलामे पाक से किया। बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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