लोकतांत्रिक समाजवाद के हिमायती थे जेपी : राजनाथ
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी। जेपी और अब्बास अली मूलरूप से लोकतांत्रिक समाजवादी थे। वह व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वापरि मानते थे। वे भारत में ऐसी समाज व्यवस्था के पक्षपाती थे जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानसिक प्रतिष्ठा और लोककल्याण के आदर्शों से परिपूर्ण हो। जयप्रकाश के जीवन में मार्क्स और गांधी दोनों का सामानांतर प्रभाव था। वहीं कैप्टन अब्बास अली भगत सिंह के बाद सुभाष चन्द्र बोस और डॉ. राममनोहर लोहिया से प्रभावित थे। इसलिए जेपी और अब्बास अली जहां एक ओर लोकतंत्रीय समाजवाद के हिमायती थे। यह बात गांधी भवन में समाजवादी पुरोधा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयन्ती और समाजवादी योद्धा कैप्टन अब्बास अली की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति सभा की अध्यक्षता कर रहे गांधीवादी राजनाथ शर्मा ने कही। श्री शर्मा ने कहा कि स्व. कैप्टन अब्बास अली आज़ाद हिन्द फौज के सिपाही थे। उन्होंने आजादी की लड़ाई में बढ-चढकर हिस्सा लिया। कैप्टन अब्बास अली डॉ राम मनोहर लोहिया की राजनीतिक परंपरा के अलमबरदार थे। वह नौजवानों को देश की उम्मीद मानते थे। जब वे खुद नौजवान थे और गुलाम देश के नागरिक थे तब भी उन्होंने इन्हीं सपनों के साथ ज़िंदगी जीने का फैसला किया था। अब्बास अली जीवन भर इंसानी बुलंदी और सामाजिक बराबरी की लडाई लड़ते रहे। इतने बुलंद इंसान के जाने के बाद आम आदमी की बराबरी की लड़ाई में एक खालीपन तो ज़रूर आया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वक़्त उसको कब पूरा करता है। श्री शर्मा ने कहा कि जेपी समाज में दलितों, पिछड़ों और निर्बल वर्ग की आवाज़ थे। इस मौके बृजेश दीक्षित, धनंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, पाटेश्वरी प्रसाद, मृत्युंजय शर्मा, सत्यवान वर्मा, राजा सिंह, साकेत मौर्या आदि लोग मौजूद रहे।
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