कथावाचिका ममता ने भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनाकर भक्तों को किया मंत्र मुग्ध
मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता
मसौली बाराबंकी। माँ काली शक्तिपीठ मन्दिर भूलीगंज मसौली में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचिका ममता शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण एव शेषनाग की कथा सुनाकर भक्तो को भक्ति में लीन कर दिया। कथावाचिका ममता शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार श्रीकृष्ण मित्रों के साथ यमुना नदी के किनारे गेंद से खेल रहे थे। भगवान ने जोर से गेंद फेंकी और वो यमुना में जा गिरी। भारी होने से वो सीधे यमुना के तल पर चली गई। मित्रों ने कृष्ण को कोसना शुरू किया। कहने लगे कि तुमने गेंद को यमुना में फेंका है, तुम ही बाहर लेकर आओ। समस्या यह थी कि उस समय यमुना में कालिया नाग रहता था। पांच फनों वाला नाग बहुत खतरनाक और विषधर था। उसके विष से यमुना काली हो रही थी और उसी जहर के कारण गोकुल के पशु यमुना का पानी पीकर मर रहे थे। कालिया नाग गरूड़ के डर से यमुना में छिपा था। उस समय कान्हा बहुत छोटे थे, लेकिन मित्रों के जोर के कारण उन्होंने तय किया कि गेंद वो ही निकाल कर लाएंगे। कान्हा ने यमुना में छलांग लगा दी। सीधे तल में पहुंच गए। वहां कालिया नाग अपनी पत्नियों के साथ रह रहा था। कान्हा ने उसे यमुना छोड़कर सागर में जाने के लिए कहा, लेकिन वो नहीं माना और अपने विष से उन पर प्रहार करने लगा। कृष्ण ने कालिया नाग की पूंछ पकड़कर उसे मारना शुरू कर दिया। बहुत देर हो गई तो मित्रों को चिंता होने लगी। उन्हें गलती का एहसास हुआ और वे रोने-चिल्लाने लगे। कुछ दौड़ कर नंद-यशोदा और अन्य गोकुलवासियों को बुला लाए। यमुना के किनारे सभी चिल्लाने लगे। इधर, कृष्ण और कालिया नाग का युद्ध जारी था। भगवान ने उसके फन पर चढ़कर उसका सारा विष निकाल दिया। विषहीन होने और थक जाने पर कालिया नाग ने भगवान से हार मानकर उनसे माफी मांगी। श्रीकृष्ण ने उसे पत्नियों सहित सागर में जाने का आदेश दिया। खुद कालिया नाग भगवान को अपने फन पर सवार करके यमुना के तल से ऊपर लेकर आया। कालिया नाग चला गया। यमुना को उसके विष से मुक्ति मिल गई। इस मौके पर कमलाशाह, लाल बहादुर वर्मा, राजेन्द्र कुमार वर्मा एलआईसी, शिवचरन, अम्बरीष वर्मा, गुड्डु यादव, रामसिंह गौतम, रामसिंह वर्मा,शिवकुमार वर्मा, अखिलेश यादव,पिंकू सैनी सहित तमाम भक्तगण मौजूद थे।
मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता

