हज़रत मख़्दूम अहमद अब्दुल हक़ साहब का उर्स 7 फरवरी से

अब्दुल जब्बार एड्वोकेट व् डॉ0 मो0 शब्बीर की रिपोर्ट

भेलसर(अयोध्या)रूदौली स्थित विश्व विख्यात हज़रत मख़्दूम साहब का 603 वां उर्स(मेला)7 फरवरी से गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी आयोजित होगा जिसमे देश के कोने कोने से हज़ारो श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करने आते है।
रुदौली में स्तिथ क़दीम ख़ानक़ाह हज़रत शैखुल आलम में गुरुवार को सज्जादानशीन शाह मोहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेले के सम्बंध में सभी पहलुओं पर बात की और बताया कि 7 फरवरी से उर्स(मेला)आयोजित होने जा रहा है जिसमें कोने कोने से हज़ारों श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करने आते है।बताया कि रुदौली नगरी को सूफी संतों ने अपनी तपस्थली का केंद्र बनाया उनमे महान सूफी मख्दूम अब्दुल हक़ साहिबे तोशा अल्हिर्रहमा(मख्दूम साहब)बहुत मशहूर है।ऐसे महान सूफी संत का 603 वां ऐतिहासिक उर्स 7 फरवरी से शुरू हो रहा है जिससे भारी संख्या में श्रद्धालु आते है।उन्होंने बताया कि मख्दूम साहब का जन्म वर्ष 1356 में हुआ था जिनका ख़ानदानी रिश्ता हज़रत उमर से मिलता है।मख्दूम साहब के पुत्र हज़रत शेख आरिफ थे जिनके शिष्य विश्वप्रसिद्ध संत अब्दुल कुद्दूस गंगोही थे जिनकी दरगाह सहारनपुर के गांगोह कस्बे में है मख्दूम साहब के पीर हज़रत जलालुद्दीन कबीरु औलिया थे जिनकी दरगाह पानीपत में है।हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक मख्दूम साहब की महफ़िल में ईश्वरी चर्चा होती है उनके शागिर्दों में विशेष रूप से बख्तियार मख्दूम हैं जो उनके साथ हक़ हक़ कहते हुये चलते थे।मख्दूम साहब ने 6 माह तक अयोध्या के पवित्र सरयू नदी में एक पैर से खड़े होकर अल्लाह की इबादत की जिससे खुश होकर अल्लाह ने हज़रत अली के हाथो से दुआऐ हैदरी अता की।मख्दूम साहब की मजार मोहल्ला
मख्दूम ज़ादा में स्तिथ दरगाह शरीफ में है क़दीम ख़ानक़ाह में जो महफ़िल समा होती है उसमें हिंदी फारसी व ऊर्दू में कव्वाल गायन करते हैं।बाबा को अपने पीर हज़रत जलाउद्दीन से ख़िरका मिला जो सदियों से उसी तरह हैं।उर्स मख्दूम अब्दुल हक़ साहिबे तोशा अल्हिर्रहमा के चार रोज़ा उर्स का प्रोग्राम के बारे में बताया कि 7 फरवरी 2020 को कदीम मस्जिद हज़रत शैखुलआलम में कुरआन ख्वानी सुबह की नमाज़ के बाद होगी,महफ़िल ए समां क़दीम खानकाह हज़रत शैखुलआलम में वा दरगाह शरीफ़ में होगी।8 फरवरी को बाद नमाज़ अस्र जियारत गागर शरीफ़ व् बाद नमाज़ मगरिब चिरागदान व् बाद नमाज़ ईशा महफ़िल-ए-समां व कुल 2 बजे रात क़दीम खानकाह हज़रत शैखुलआलम में होगा।9 फरवरी को शैखुल आलम कॉन्फ्रेंस वा तकरीबे रस्मे इजरा सुबह 9 बजे क़दीम खानकाह हज़रत शैखुलआलम व् बाद नमाज़ ज़ोहर महफ़िल-ए-समां,बाद नमाज़ अस्र जियारत ख़िरका शरीफ़ (बड़ा ख़िरका)व तबर्रुकात की जियारत सज्जादा नशीन शाह मोहम्मद अली आरिफ उर्फ़ सुब्बू मियाँ करायेगे।10 फरवरी को बाद नमाज़ फज्र ग़ुस्ल दरगाह मखदूम अब्दुल हक़ व् बाद नमाज़ ज़ोहर महफ़िल-ए-समां बड़ा रौज़ा हज़रत शैखुल आलम में होगा।इस मौके पर शाह मोहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां,शाह शम्स तबरेज़ उर्फ शम्मू मियां,शाह ओवैस अहमद,शाह फारूक़ अहमद,शाह उस्मान अहमद,सभासद मो0अज़ीम खान,शाह नोमान अहमद,शाह वसी अहमद,शाह आमिर,शाह सईद अहमद,शाह राज़ अहमद,शाह नासिर,शाह फरीद अहमद,शाह मोहम्मद अहमद,शाह शबीह अहमद,अम्मू मियां,मास्टर रिज़वान,फ़ैज़ अहमद,शाह ईमान अहमद,सईद अहमद,शरीफ असलम,साज़िद,शादाब, अरशद आदि मौजूद थे।

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