झाड़-फूंक से नहीं सही इलाज व खानपान से दूर होगी टीबी सुमन फाउंडेशन ने टीबी ग्रसित पांच बच्चों को लिया गोद
मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता दरियाबाद बाराबंकी।7874257456
बाराबंकी। जनपद में आज भी कुछ लोगों में यह ग़लतफ़हमी है जो बच्चों के इलाज कराने पर उतना भरोसा नहीं करते जितना कि झाड़-फूंक पर। यह बात उस वक्त निकलकर आई जब स्वयंसेवी संस्था सुमन फाउंडेशन ने पांच टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेकर उनके पौष्टिक आहार, इलाज आदि के बारे में फालोअप शुरू किया। ऐसे परिवारों को जागरूक किया जा रहा है कि बच्चों में किसी तरह की दिक्कत समझ आये तो उसको स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक को जरूर दिखाएँ क्योंकि छोटी से लेकर गंभीर बीमारी तक का निदान इलाज से ही संभव है ना कि झाड़फूंक से। जनपद को टीबी मुक्त बनाने को लेकर विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इसी के तहत टीबी मरीजों को गोद लेकर इलाज के दौरान पोषक आहार के साथ ही भावनात्मक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं और व्यक्तिगत लोग सामने आये हैं। जनपद के 2300 से ज्यादा टीबी से ग्रसित बच्चों को उच्च अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) ने निक्षय मित्र के रूप में गोद लिया है। इसका असर भी देखने को मिला है कि इलाज के साथ समुचित देखभाल से बच्चे जल्दी बीमारी से छुटकारा पा रहे हैं। स्वयंसेवी संस्था सुमन फाउंडेशन की चेयरमैन सुमन श्रीवास्तव बताती हैं कि बीते छह अप्रैल को जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से 18 साल से कम उम्र के पांच टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लिया। उनको पोषाहार प्रदान करने के साथ ही नियमित दवा सेवन के लिए प्रेरित किया। उस समय कुछ परिवारों को दवा से ज्यादा झाड़ फूंक पर भरोसा था। ऐसे में परिवार वालों को समझाकर बच्चों को नियमित दवा एवं पौष्टिक आहार खिलाने तथा स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया। बच्चों से भी बातचीत कर उनकी परेशानी समझी। उनके परिजनों को प्रति माह जिला क्षय रोग केन्द्र बुलाकर वजन लेकर दवा दिलाया। समय-समय पर पौष्टिक आहार भी मुहैया कराया। उनको हमेशा हिम्मत बंधाई। इसके फल स्वरूप तीन बच्चों की सितम्बर एवं दो बच्चों की नवम्बर 2022 को हुई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आयी। अब सभी बच्चे पूरी तरह से ठीक हैं।
डाट सेंटर से मिलती है दवा व आर्थिक मदद
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. विनोद कुमार दोहरे का कहना है कि स्वयंसेवी संस्थाएं टीबी ग्रसित बच्चों सहित अन्य सभी को गोद लेने को लगातार आगे आ रही हैं। बच्चों को नोटिफाई कर उन्हें इलाज पर रखा जा रहा है। इसके अलावा निजी चिकित्सकों, निजी नर्सिंग होम, मेडिकल स्टोर आदि के माध्यम से भी उन बच्चों को नोटिफ़ाई किया जा रहा है जो बिना किसी चिकित्सीय सलाह या जांच के दवा का सेवन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों को डाट सेंटर से निशुल्क दवा मिलती है। इसके साथ ही सरकार की ओर से निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज चलने तक 500 रुपये प्रति माह सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। मोहम्मद वसीम कुरेशी संवाददाता दरियाबाद बाराबंकी।7874257456

