बाराबंकी। वो जिनके हाथ में हर वक्त छाले रहते हैं, आबाद उन्हीं के दम पर महल वाले रहते हैं। आज अगर हम पैसों के दम पर बड़े-बड़े मकान बना कर उसमें रहते हैं, तो उस मकान की नींव से लेकर पूर्ण करने तक का समस्त कार्य जिसकी मेहनत से पूरा हो पाता है वो एक गरीब मजदूर होता है। उक्त बात समाजसेवी हर्षित राजकुमार ने अपने साथियों के साथ लगभग 5000 लंच पैकेट, 2000 बूंदी के पैकेट, बच्चों के लिये 500 ओ. आर. एस. के पैकेट तथा 300 मास्क व सेनीटाइजर वितरित करते हुये कही। इसके साथ-साथ उन्होंने 15 गरीब परिवारों के लिये राशन का भी प्रबंध कराया। उन्होंने इस बार भी लॉकडॉउन का पूरी निष्ठा से पालन करते हुये सफेदाबाद हाईवे, बड़ेल के साथ-साथ पूरे शहर को कवर किया तथा इस बात का विशेष ध्यान रखा कि उनकी इस मुहिम से एक भी गरीब भाई वंचित न रह जाये। इस मौके पर बोलते हुये हर्षित राज ने कहा कि आज हमारे गरीब भाईयों को हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है, ऐसे में अगर हम आगे आकर उनका साथ नहीं देंगे तो ईश्वर हमें कभी माफ नहीं करेगा। और यदि भगवान ने हमें सक्षम बनाया है तो यह हम सब का कर्तव्य बनता है कि सकंट की इस घड़ी में हम हमारे गरीब तथा मजदूर भाईयों की तथा उनके परिवार की जितनी हो सके उतनी मदद करें। उन्होंने इसके आगे बताया कि कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिये यूं तो सरकार व प्रशासन अपना-अपना काम कर रहे हैं पर इन सब के साथ-साथ यह हमारा भी दायित्व है कि हम इस बात का विशेष ध्यान रखें कि हमारा एक भी गरीब भाई भूखा न सोये। आज हमें जाति-धर्म की इन बेड़ियों को तोड़कर आगे आना होगा क्योंकि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। इसके बाद उन्होंने बाराबंकी वासियों से यह अपील करते हुये अपनी बात समाप्त की कि हमारे पूर्वजों ने हमेशा हमें मिल-जुलकर रहना सिखाया है तो क्यों न हम यूँ ही एक दूसरे का सहारा बनकर कोरोना को हमारे प्यारे भारत देश से मार भगांए। इस मौके पर मुख्य रूप से साथी मो. फैज अहमद, एड. हुजैफा खान, पत्रकार अदीब किदवाई ने भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया।

