गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को बताईं गन्ने की किस्म।

सवायजपुर तहसील क्षेत्र के भैलामऊ गांव में सोमवार को रूपापुर चीनी मिल  और गन्ना विकास समिति के संयुक्त तत्वाधान में सोमवार को बसंतकालीन गन्ना बुवाई को लेकर किसान गोष्ठी लगी। जिसमें पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की किस्म और उसमें लगने वाले रोगों से बचाव की जानकारी दी।

डीसीएम श्री राम शुगर मिल रूपापुर व गन्ना विकास समिति के संयुक्त तत्वाधान में सोमवार को बसंतकालीन गन्ना बुवाई को लेकर किसान गोष्ठी लगी। जिसमें पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की किस्म और उसमें लगने वाले रोगों से बचाव की जानकारी दी।सोमवार को भैलामऊ में हुई किसान जिसमे मुख्य रूप से चीनी मिल रूपापुर के महाप्रबंधक प्रभात कुमार सिंह , सहायक निदेशक गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर डॉ पी के कपिल वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस पी यादव , उत्तर प्रदेश  गन्ना संध के डायरेक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह डीजीएम ललित सैनी , संजय  सिंह व विवेक सिंह मौजूद रहे ।

डॉ पी के कपिल  ने बताया कि लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र में एक ही प्रजाति के गन्ने की बुवाई हो रही है। इतना रकबा होना गन्ने की टिकाऊ खेती एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह उचित नहीं है, क्योंकि बहुत से रोग एवं व्याधि किसी एक प्रजाति में फैलने की संभावना अधिक रहती है।बसंत कालीन गन्ना बुवाई के अंतर्गत अधिक से अधिक क्षेत्र में हैग्जास्टाप नामक फुफंदी नाशक दवाई से गन्ना बीज व ट्राइकोडरमा से भूमि को शोधित कर गन्ना बीज के ऊपर आधे हिस्से की बुवाई करें, जिससे गन्ने की फसल को रेड रोट गन्ने का कैंसर नामक बीमारी से बचा जा सके तथा अच्छी उपज प्राप्त की जा सके।

चीनी मिल के जीएम प्रभात कुमार सिंह ने  किसानों को सलाह देते हुये बताया कि ट्रेंच विधि से अधिक से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की बुवाई करें जिससे कम लागत में अधिक से अधिक गन्ने की उपज ली जा सके। गन्ने की अच्छी पैदावार लेने हेतु फरवरी व मार्च माह में गन्ना बुवाई करने से अच्छी पैदावार ली जा सकती  है जीएम प्रभात कुमार सिंह ने कहा मिल व कृषक एक दूसरे के पूरक और पोषक है इसलिए उन्हें प्रजाति की बुवाई करें

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