कामयाब इन्सान वही है जो अपने मालिक का वफादार हो : मौलाना फैज़ अब्बास कर्बला में सोशल डिस्टेसिंग के बीच मजलिस संपन्न
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211
बाराबंकी। मोहम्मद (स.अ.व.) का दीन इश्क़े अली (अ.स.) में पला बढ़ा और परवान चढ़ा। जो आज तक पहला वार नहीं करता सिर्फ़ अपने बचाव में डिफ़ेंस के लिए हथियार उठाता है। बादे नबी जो भी अली के मुक़ाबिल आया दुश्मने दीन था। जिसके पैरोकार आज भी दीन के दुश्मन हैं। बनी उमैया का इस्लाम तलवार के जोर पर आगे बढ़ा, जिसके नतीजे में लोग इस्लाम को दहशतगर्द समझ बैठे। जब कि इस्लाम का दहशतगर्दी से कोई सरोकार नहीं। यह बात करबला सिविल लाइन में शहीदाने कर्बला व असीराने कर्बला के उनवान से होने वाली मजलिस को खि़ताब करते हुए आली जनाब सैयद फ़ैज़ अब्बास मशहदी ने कही। 11 मोहर्रम को कर्बला में होनी वाली मजलिस कोरोना महामारी को देखते हुवे सोशल डिस्टेसिंग का ख्याल रखते हुवे आगाज हुआ। मौलाना ने यह भी कहा कि हुसैन अ तो भटके हुए लोगों को दीन की राह दिखाने के लिये करबला आए। जिसने हिदायत चाही उसे नजात का रास्ता मिल गया। जो मालो दुनियां की लालच में अंधे हो चुके थे वह उनके दुश्मन हो गये।उनकी नश्ले आज भी दुनियां की रंगीनियों में खोकर ओहदे और एक़्तेदार की लालच में पड़कर वख़्त के हुसैन से दूर होती नज़र आ रही है। खुद को रौशन करने के लिए जिसकी जुस्तजू ख़ुद जंनत करे उस ख़ास बन्दे को हुसैन कहते हैं। हक़ हमेशा इमाम के पीछे पीछे चलता है। अली का रास्ता ही सिराते मुस्तकीम है। कामयाब बन्दा वही है जो अपने मालिक का फ़रमाबरदार हो। आखिर में हुसैन अ के छोटे बेटे करबला के सबसे कमसिन छः माह के अली असगर के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिस से पहले डा. रज़ा मौरानवी ने पढ़ा-उसे भी आंखों में आंसू पिरोना चाहिए था, समन्दरों के लबों को भिगोना चाहिए था। मगर कमाले शजाअत तो देखो असग़र का, वहां हंसा है, जहां इसको रोना चाहिए था। कशिश संडीलवी ने पढ़ा-ज़िक्रे सर वर को कभी तुम न अंधेरा लिखना, जब भी लिखना इसे ईंमां का उजाला लिखना। बाक़र नक़वी ने पढ़ा अपने ओठों पा अगर प्यास का दरिया रखना, जहन में असगरे मासूम का चेहरा रखना। मुजफ्फर इमाम ने पढ़ा-ख़ुतबों से काट दे जो वो तलवार है जैनब आबिद के साथ सब्र की दीवार है जै़नब ।हाजी सरवर अली करबलाई ने पढ़ा- उसको वजूद ए दीन ए रसूल ए खुदा कहो, बाक़ी है, जिससे दीन उसे करबला कहो। सरवर तेरे लबों पे जो हुस्ने कलाम है, इसको सगीर ए कर्बाबला की अता कहो। इसके अलावा अयान अब्बास, मो. गाज़ी, मो. हसन अस्करी जै़दी व केयान अब्बास ने नज़रानये अक़ीदत पेश की। मजलिस का आगा़ज़ मुजफ्फर इमाम ने तिलावते कलामे इलाही से किया। मजलिस के बाद अलम, ताबूत व गहवारये अली असगर की शबीह की जियारत कराई गई। जिसमे मक़ामी अन्जुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की। प्रोग्राम समाप्ति के बाद आसिफ हुसैन व शदाब ज़ैदी ने मजलिस में आये सभी मोमिनो का शुक्रिया अदा किया।
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

