ईश्वर की कृपा से अमरीका की शैतानी नीति ‘सेन्चुरी डील’ कभी लागू नहीं होगीः वरिष्ठ नेता का ट्वीटर हैंडल

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के ट्वीटर हैंडल पर सेन्चुरी डील की भर्त्सना की गयी है।
ट्रम्प की इस योजना पर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के ट्वीटर हैंडल पर लिखा हैः “फ़िलिस्तीन के संबंध में ‘सेन्चुरी डील’ के नाम से अमरीका की शैतानी नीति ईश्वर की कृपा से कभी भी लागू नहीं होगी। बैतुल मुक़द्दस के बारे जो लोग कहते हैं कि उसे यहूदियों के हाथ में होना चाहिए, बकवास करते हैं।”
इससे पहले इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा था कि फ़िलिस्तीन का मामला नहीं भुलाया जा सकता और फ़िलिस्तीन सहित सभी मुसलमान राष्ट्र “सेन्चुरी डील” के ख़िलाफ़ डट जाएंगे। इसे व्यवहारिक होने नहीं देंगे।

 

इराक़ को तोड़ कर एक अलग सुन्नी क्षेत्र बनाने की अमरीकी योजना का, इराक़ी सुन्नियों ने ही विरोध कर दिया …

इराक़ के अलअंबार प्रांत के एक क़बायली सरदार ने बताया है कि इस प्रांत के सभी सुन्नी क़बीले, देश को तोड़ कर एक अलग सुन्नी क्षेत्र बनाने की अमरीकी योजना के विरोधी हैं।
शैख़ अली दुलैमी ने कहा कि अलअंबार प्रांत के सभी सुन्नी क़बीले ऐसी हर योजना के विरोधी हैं जिसके तहत इराक़ को तोड़ कर अलअंबार में एक पृथक सुन्नी क्षेत्र बनाया जाए। उन्होंने अलमालूमा न्यूज़ वेबसाइट से बात करते हुए कहा कि कुछ लोग अन्य देशों में बैठक कर अलअंबार में एक अलग क्षेत्र बनाने की योजना बना रहे हैं और मेरा कहना है कि उनके फ़ैसलों से कुछ भी फ़र्क़ पड़ने वाला नहीं है क्योंकि अलअंबार में हम सब, इराक़ के साथ एकता व एकजुटता पर सहमत हैं।

शैख़ दुलैमी ने कहा कि अगर अलअंबार को एक अलग क्षेत्र बनाया गया तो इससे इराक़ के टुकड़े होंगे और देश के मामलों में विदेशी हस्तक्षेप आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बारे में सक्रिय हैं उनके लिए बेहतर होगा कि उन लोगों की बातें सुनने के बजाए जो इराक़ का भला नहीं चाहते, उन हज़ारों शरणार्थियों की अपने घरों की ओर वापसी के लिए कोशिश करें जिन्हें दाइश ने बेघर कर दिया था। शैख़ दुलैमी ने कहा कि जो लोग इराक़ में अलग सुन्नी क्षेत्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं वे वास्तव में अलअंबार प्रांत को तबाह करना और इस प्रांत में दाश की वापसी की राह समतल करना चाहते हैं।

ज्ञात रहे कि वाॅशिंग्टन ने इराक़ से अमरीकी फ़ौजियों को निकालने के बग़दाद के फ़ैसले से पहले इस देश के सुन्नी व कुर्द दलों को संसद की बैठक में भाग लेने से रोकने की कोशिश की लेकिन जब यह विधेयक पारित हो गया तो उसने इराक़ में एक अलग सुन्नी क्षेत्र बनाने बनाने का षड्यंत्र शुरू कर दिया और इस परिप्रेक्ष्य में उसने इराक़ से बाहर अबू धाबी और वाॅशिंग्टन में कई बैठकें आयोजित कराईं।

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