10 हज़ार अमरीकियों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके ईरानी जनता पर अपनी सरकार की ओर से लादे गये दुखों और कष्टों के लिए माफी मांगी है।
वूमेन फॅार पीस ने मंगलवार को वाशिंग्टन में ईरान के हितों की रक्षा करने वाले कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यालय के अधिकारियों को एक पत्र दिया है।
यह पत्र वूमेन फॅार पीस की संस्थापक मीडिया बेंजामिन और उनके कुछ साथियों ने ईरान के हितों की रक्षा करने वाले कार्यालय के हवाले किया। पत्र में लिखा गया है कि चूंकि अमरीकी, सब की शांति व सुरक्षा के इच्छुक हैं इस लिए इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले हम अमरीकी अपने राष्ट्रपति द्वारा घृणा पर आधारित क़दमों की वजह से माफी मांगते हैं।
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने लिखा है कि ईरान के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप का अमरीका का भयानक अतीत रहा है और आप के देश में तेल के राष्ट्रीय करण को रोकने के लिए सन 1953 में जो विद्रोह कराया गया था और जिसकी वजह से आप की प्रतातांत्रिक व निर्वाचित सरकार गिर गयी थी, नैतिकता से परे था।
अमरीका के शांति प्रेमी लोगों ने इसी प्रकार ईरान के खिलाफ अमरीका की हालिया कार्यवाहियों को डोनाल्ड ट्रम्प की विदेशी नीतियों का बेहद खतरनाक व भड़काऊ फैसला बताया और लिखा कि ट्रम्प के आदेश से इराक़ में लेफ्टिनेंट जनरल शहीद क़ासिम सुलैमानी की हत्या से विश्व शांति खतरे में पड़ गयी और यह क़दम अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर गैर कानूनी था।
इस पत्र में लिखा गया है कि एक के बाद एक होने वाले सर्वे से पता चलता है कि अमरीकी जनता, ईरान के साथ युद्ध या तनाव की इच्छुक नहीं है, वह ईरानी जनता के साथ शांति व सुरक्षा का जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, कृपया दोस्ती का हाथ स्वीकार करें, शायद शांतिप्रेमियों की मतभेद व घृणा को बढ़ावा देने वालों पर विजय हो ही जाए।
इस पत्र पर 10 अमरीकियों ने हस्ताक्षर किये हैं। इस से पहले भी अमरीका के कई कलाकारों, राजनेताओं और बुद्धिजीवियों ने ईरान के खिलाफ अपने देश की कार्यवाहियों पर ईरान से माफी मांगी है।
क़ासिम सुलेमानी की शहादत के बाद से अमेरिका लगातार अपने अधिकारियों के शवों की गिनती कर रहा है!

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में तबाह हुए सैन्य विमान में मिले शवों की पहचान करने में व्यस्त हैं।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी सैन्य सूत्रों ने बताया है कि, अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमेरिकी अधिकारी इस देश के ग़ज़नी प्रांत में तबाह होने वाले अमेरिका के सैन्य विमान में मारे गए अधिकारियों की पहचान करने के और तबाह विमान के टुकड़ों को एकट्ठा करने के काम में व्यस्त हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 जनवरी को अफ़ाग़ानिस्तान में तबाह हुए अमेरिकी सैन्य विमान में, अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के कई महत्वपूर्ण अधिकारी सवार थे। इस बीच रूसी सूत्रों ने भी सूचना दी है कि, अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका का जो जहाज़ गिरा है उसमें माइकल दि एंड्रा नामक सीआईए के वह अधिकारी भी मौजूद था जिसने शाहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
उल्लेखनीय है कि माइकल दि एंड्रा को मध्य पूर्व में अमरीकी योजनाओं को लागू करने वाले मुख्य लोगों में समझा जाता रहा है। बताया जाता है कि, माइकल दि एंड्रा सीआईए में ईरान, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले अभियानों के प्रभारी था और उसे सीआई में “आयतुल्लाह माइक” भी कहा जाता था।
इस बीच जहां एक ओर अमेरिकी अधिकारी अभी अफ़ग़ानिस्तान में तबाह हुए अपने सैन्य विमान में सवार अधिकारियों के शवों की पहचान और उनकी गिनती में व्यस्त थे तभी बुधवार को इराक़ से ख़बर आ गई कि, इराक़ स्थित एनुल असद सैन्य छावनी के पास एक अन्य अमेरिकी सैन्य विमान गिरकर तबाह हो गया है जिसमें 4 अमेरिकी आतंकी सैनिक मारे गए हैं।
याद रहे कि 3 जनवरी को इराक़ की राजधानी बग़दाद के अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास अमेरिका ने एक आतंकी कार्यवाही करके आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिग्रेड के कमांडर शहीद क़ासिम सुलेमानी और इराक़ के स्वयंसेवी बल हश्दुश्शाबी के डिप्टी कमांडर शहीद अबू मेहदी अल-मोहन्दिस को उनके की साथियों के साथ शहीद कर दिया था। अमेरिका की इस आतंकी कार्यवाही के बाद से वह हर दिन मध्यपूर्व में अपने सैनिकों और अधिकारियों के शवों की गिनती करने में व्यस्त है।

