दस कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग पर दो माह के लिए उत्तर प्रदेश में लगा प्रतिबंध

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984

बदायूँ। जिला कृषि रक्षा अधिकारी दुर्गेश कुमार सिहं ने अवगत कराया है कि लम्ंबे समय तक अपना प्रभाव छोड़ने वाले कीटनाशकों के प्रयोग से चावल की गुणवत्ता दुनिया के विभिन्न देशों में मानक पर खरी नही उतर पा रही हैं। इससे निर्यात में बाधा आ रही है। इसके उत्पादन में ज्यादा क्षमता के कीटनाशक का उपयोग किया था। अब ऐसे ज्यादा क्षमता वाले 10 कीटनाषकों को ब्रिक्री और प्रयोग पर पूरी तरह से दो माह के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इन दो माह में धान की फसल कट जायेगी।
प्रदेश के 30 जिलो में इन दवाईयों पर बैन है। इसमें जनपद बदायूॅं भी शामिल है क्योंकि यहॉ भी धान का उत्पादन होता है। धान की फसल का समय जुलाई से नवंम्बर तक होता है। सितम्बर माह के अंन्तिम पखबाड़े में फसल पकाव की ओर बढ़ती है। इन्हीं दिनों में कीट और रोगों का अधिक प्रकोप होता है। नियंत्रण को क्लोरोपाइरीफॉस, एसीफेट, ट्राइसाइक्लाजोम, कार्बेन्डाजिम, आइसोप्रोथिनयोलोन, प्रोफेनोफॉस, प्रोपिकोनाजोल, मेथामिडोफॉस, थायोमेथाक्साम व बुप्रोफेजिन जैसे रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग किसान करते है। इसका असर दाने पर लंबे समय तक बना रहता है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्रधिकरण (एपीडा) भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपिय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और खाड़ी देषों में निर्यात किए गए चावल में कीटनाषकों के अवषेश पाए गए। इन देशों में कीटनाशकों के अवशेष को लेकर कड़े मानक नियत है। इसलिए चावल के निर्यात में 15 प्रतिशत की कमी आई। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि 30 सितंबर से उपरोक्त कीटनाशकों की ब्रिक्री पर 60 दिन के लिए प्रदेश में रोक लगाई गई है। प्रतिबंधित कीटनाशकों के फार्मलेशन की बिक्री, वितरण और प्रयोग भी वर्जित है। समस्त कीटनाशक विक्रेता जिले में कड़ाई से इसका अनुपालन करेंगे, यदि कोई कीटनाशी विक्रेता आदेश का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कार्यवाही की जायेगी।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984

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