बाराबंकी: क्षेत्र के सरायनेतामऊ शिव मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ में हुआ। बैंडबाजों की धुन पर निकले भक्तजनों ने पूरे गांव को भक्तिमय कर दिया। गाजे-बाजे के बीच निकली कलश यात्रा के दौरान हर तरफ भक्ति का माहौल दिखाई दिया। श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। कलश यात्रा के समापन पर विधि विधान से कलश की स्थापना हुई।
कलश यात्रा शिव मंदिर से शुरु होकर नेतामऊ मंदिर होते हुए प्रगाटेश्वर नाथ मंदिर पहुंची यहां पर मन्दिर के पुजारी ने कन्याओं को चुनरी भेंट कर पूजा अर्चना की इसके बाद कलश यात्रा दुर्गा माता के मंदिर से होते हुए शीतला माता मंदिर से होकर कथा स्थल पर पहुंची। यहां पर कथा व्यास सुरेश मिश्रा महाराज ने विधि विधान से पूजा कराई। आचार्यो द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कलश को स्थापित कराया गया। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के उदघोष से पूरा वातावरण पवित्र हो गया था।इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा में महिलाएं व बालिकाओं ने भारी संख्या में भाग लिया। पहले दिन की कथा के शुभारंभ पर कथा व्यास ने कहा विश्व में सभी कथाओं में श्रीमद् भागवत कथा श्रेष्ठ मानी गई है। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है, वो तीर्थ स्थल कहलाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियों को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है। रामलखन शर्मा, ललित शर्मा,अजीत शर्मा,लवकुश शर्मा,राम जी शर्मा, कमलेश धीमान,केदार रावत,संतराम,नेवाल कुमार आदि लोग मौजूद रहे।

