ट्रम्प आग से खेल रहे हैं, क्या गृह युद्ध की ओर जा रहा है अमरीका? अरब नेताओं और नेतनयाहू से क्या है ट्रम्प की समानता?
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प देश में डेमोक्रेट प्रशासन के ख़िलाफ़ अपने समर्थकों को उकसा रहे हैं और हथियारों से लैस प्रदर्शनकारियों से कह रहे हैं कि वह सड़कों पर उतर पडें और स्थानीय प्रशासनों की ओर से कोरोना वायरस के कारण किए गए लाक डाउन को पूरी तरह नज़र अंदाज़ कर दें।हम समझते हैं कि ट्रम्प जो कुछ कर रहे हैं, अमरीका के इतिहास में ही नहीं बल्कि पश्चिम के पूरे लोकतांत्रिक इतिहास में इसका कोई उदहारण नहीं है।
ट्रम्प अपने ट्वीटर एकाउंट पर साफ़ साफ़ अपने गोरे समर्थकों से मांग कर रहे हैं कि मिशिगन को आज़ाद करा लो, मिनेसोटा को आज़ाद करा लो, वरजीनिया को आज़ाद करा लो! इन तीनों राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी का राज है। यह दावत दरअस्ल अराजकता फैलाने की खुली दावत है, यह उस देश में गृह युद्ध छेड़ देने की कोशिश के समान है जिसे हथियारों का जंगल कहा जाता है।
इन तीनों राज्यों में जिन्हें आज़ाद कराने की बात ट्रम्प कर रहे हैं आने वाले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प को भारी टक्कर मिलने वाली है। तीनों ही राज्यों में कोरोना के संक्रमितों की भारी संख्या है।
ट्रम्प के बेहद ग़ैर ज़िम्मेदाराना ट्वीट से केवल सुरक्षा और व्यवस्था ही ख़तरे में नहीं पड़ेगी बल्कि इसके नतीजे में अमरीका तथा दूसरे देशों में कोरोना वायरस का प्रसार भी बढ़ेगा।
हो सकता है कि कुछ लोग कहें कि प्रदर्शन करना तो लोकतांत्रिक अधिकार है जो अमरीकी संविधान ने नागरिकों को दिया है। यह बात सही है लेकिन अगर राष्ट्रपति नस्लवादी नज़रिए के तहत और आर्थिक फ़ायदे को दृष्टि में रखते हुए हंगामे की दावत दे तो यह त्रासदी की दावत है। अमरीका जातीय और नस्ली बुनियादों पर बटा हुआ देश है इस देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कब हिंसक झड़पों में बदल जाएं कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर एक बार प्रदर्शन फूट पड़े और झड़पें शुरु हो गईं तो हरगिज़ रुकने वाली नहीं हैं। इसके कई उदाहरण मौजूद हैं।
अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 40 हज़ार से अधिक हो गई है और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प कहते हैं कि महामारी से 60 से 65 हज़ार लोगों की जान जाएगी। अब अगर ट्रम्प वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सुझाव और अनुशंसा को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे और लाकडाउन और आइसोलेशन से लोगों को बाहर निकलने के लिए उकसाते रहेंगे तो हमें यही कहना चाहिए कि ट्रम्प आग से खेल रहे हैं जिसमें पूरा देश जल जाएगा। यह बात वाशिंग्टन के गवर्नर ने भी हाल ही में कही है।
दो लोग हैं जिन्होंने लोकतंत्र को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है और उनकी मंशा है कि अगर वह सत्ता में न रहें तो चारों ओर अराजकता फैल जाए। इनमें एक तो अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प हैं और दूसरे इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू। एक तरह से वह संदेश दे रहे हैं कि अगर हम सत्ता में नहीं रहेंगे तो सब कुछ जलाकर राख कर देंगे।
कुछ लोग कहने लगे हैं कि ट्रम्प अमरीका के गोर्बाचोफ़ हैं क्योंकि गोर्बाचोफ़ अपनी नीतियों से सोवियत संघ को ध्वस्त करने में सफल हुए थे। हो सकता है कि ट्रम्प भी गृह युद्ध की आग भड़का कर वही भूमिका निभाएं।
ट्रम्प को केवल पूंजी दिखाई देती है और व्यापार व व्यापारी ही हमेंशा उनकी नज़र में रहते हैं। उनकी नज़र में दूसरे मानवीय मापदंडों की कोई हैसियत नहीं है। अब अगर उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ दिशा में हालात गए तो वह अमरीका ही नहीं पूरी दुनिया को तबाह कर देने पर तुल जाएंगे।
आने वाले चुनावों में ट्रम्प के जीतने की संभावना बहुत कम हो गई है। यही डरावना भविष्य ब्रिटेन के बोरिस जानसन और इस्राईल के नेतनयाहू के सामने भी है।
ट्रम्प भी अरब डिक्टेटरों की तरह हैं बस उनके बालों का कलर अलग है। इस प्रकार के व्यक्ति को कहीं कोई लोकप्रियता नहीं मिलती अगर मिलती है तो अरब नेताओं के बीच मिलती है। अरब नेताओं और ट्रम्प की परिस्थितियों में कुछ बुनियादी अंतर हैं। एक तो यही है कि ट्रम्प के विरोधी गवर्नर लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए हैं और अमरीका में हर व्यक्ति के हाथ में हथियार मौजूद है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

