बहराइच 30 सितम्बर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के सभागार में गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अन्र्तगत खाद्यान्न फसलों के बीज उत्पादन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ0 एमपी सिंह ने बताया कि स्वस्थ्य एवं शुद्व बीज का कृषि निवेश में महत्वपूर्ण स्थान है, अच्छी अंकुरण क्षमता, ओज एवं भौतिक व अनुवांशिक शुद्धता वाला बीज ही भरपूर उत्पादन दे सकता है। डॉ0 सिंह ने बताया कि कतिपय अवसरों पर अनेक कारणों से प्रमाणित बीज उपलब्ध ना हो पाने की स्थिति में किसान भाइयों को घर पर रखे अनाज को ही बीज के रूप में उपयोग करने पर बाध्य होना पड़ता है। जिससे अच्छा उत्पादन नहीं मिल पाता है, और 20 से 25 प्रतिशत पैदावार में कमी आ जाती है क्योंकि घर के बीज का जमाव है कि नहीं है की जानकारी नहीं होती है, तथा अनुवांशिक भौतिक रूप से शुद्ध ना होने के कारण भी अच्छी पैदावार नहीं मिल पाती है। बीमारी युक्त दाने होने से समस्त फसल रोग ग्रसित भी हो जाती है, साथ ही साथ उत्पादन भी कुप्रभावित होता है तथा बाजार में दाम भी कम मिलता है। जिससे किसान भाइयों को आर्थिक हानि होती है, यदि बोने के लिए समय पर प्रमाणित बीज नहीं मिल पाता है तो ऐसी स्थिति में थोड़ी सावधानी बरतने पर किसान भाई स्वयं भी बोने के लिए प्रमाणित बीज तैयार कर सकते हैं, तथा भरपूर अनाज पैदा कर सकते हैं।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित किये जाने वाले किसान मेलों के दौरान या किसी भी अन्य विश्वसनीय श्रोत से अपने क्षेत्र के अनुकूल फसलध्प्रजाति का आधारीय बीज प्राप्त कर सकते है। केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ आर0 के0 पाण्डेय ने बताया कि में बीज उत्पादन के अंतर्गत अनुवांशिक शुद्धता एवं अंकुरण क्षमता को बनाए रखने के लिए बीज की बुवाई से लेकर कटाई तक अनेक प्रकार की सावधानियां अपनानी पड़ती हैं। इससे बीज उत्पादक को मानक विधियों का पालन करना आवश्यक होता है जिससे उत्पादित बीज, अच्छे अंकुरण क्षमता और उच्च कोटि की गुणवत्ता वाला बीज प्राप्त हो सकता है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ पांडये ने बताया कि दूसरे शब्दों में बीज उत्पादन,संसाधन, भण्डारण आदि के दौरान बीज की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले समस्त कार्य को प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर उच्च कोटि के बीज प्राप्ति की विधि को उन्नत बीज उत्पादन कहा जाता है।
प्रशिक्षण समन्वयक वैज्ञानिक रेनू आर्या ने बीज प्रमाणीकरण प्रक्रिया एवं संस्था एवं बीज विपणन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण में जनपद के सभी विकासखण्डों से 35 प्रवासी श्रमिकों ने प्रतिभाग किया। तथा कृषि विभाग के अधिकारी एवं तकनीकी सहायकों भी प्रशिक्षण में अपना योगदान दिया।

