बाराबंकी। हिन्दुस्तान आज भी गांवों में बसता है। वही गांव जहां किसान अपनी मेहनत से अन्न उगाता है और देश का भरण पोषण करता है। जिसे देश की रीढ भी कहा जाता है। ऐसे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाए भुखमरी की ओर ले जाने का काम किया जा रहा है। यह बात किसान आन्दोलन के चार माह पूरे होने पर गांधी भवन में महात्मा गांधी के समक्ष एकदिवसीय उपवास रखने वाले सत्याग्रही समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कही। श्री शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्याग्रह ही एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से अहिंसक आन्दोलन किया जा सकता है। किसान संगठन एक लम्बे समय से कृषि विधेयक के विरोध में सत्याग्रह कर रहे हैं जबकि सरकार उन किसानों की बातों को सुनने के वजाय चुनाव में व्यस्त है। श्री शर्मा ने कहा कि किसान हित में समस्या का समाधान कृषि विधेयक की वापसी से ही सम्भव है। हाल ही में मेरे पुराने समाजवादी साथी सत्यपाल मलिक ने भी किसानों की मांगो के संदर्भ में वक्तव्य देकर आंशिक रुप से समर्थन किया है जो राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर हैं। आन्दोलनों में जो परेशानियां आम जनता को उठानी पड़ रही है वह जीवन की बहुत कठिन परिस्थितियां होती हैं। महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और अहिंसा से भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्त कराया। लेकिन भाजपा सरकार सत्याग्रह करने वालों के विरुद्ध मुकदमें दर्ज कर रही है। जो न्याय संगत नही है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार में किसान, नौजवान, मजदूर हर वर्ग परेशान है। यही नही ग्रहणियां भी बड़ी महंगाई के चलते परेशानी झेल रही हैं। सरकार की उदासीनता ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

