अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

बाराबंकी। गांधी जयन्ती की 152वीं वर्षगांठ पर गांधी भवन में 43वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिला बार एसोसिएषन के पूर्व अध्यक्ष बृजेष दीक्षित ने की। मुषायरे की निजामत प्रख्यात शायर डॉ. शकील मोईन ने की।
कवि सम्मेलन एवं मुषायरा में अपने अंदाज़ में कलाम पेष करते हुए गीतकार कुंवर जावेद ने फरमाया कि ‘तितलियाँ छूने से या फूलों की बारिश करके। मदभरे प्यार की आंधी तो नहीं बन सकता।। हर कोई देश में बस चरखा चला लेने से। नेता बन सकता है गांधी तो नहीं बन सकता है।।’ उन्होंने फिर आगे अपना कलाम पढ़ा ‘कोई हिन्दुत्व के इस्लाम न पूछा जाये, मरने के बाद का अंजाम न पूछा जाये।। मेरी आंखों में पढ़ी जाये वतन की खुशबू, कौन हूँ मुझसे मेरा नाम न पूछा जाये।।’ मुषायरा की निजामत करते हुए चम्पारण से आए प्रख्यात शायर डा. शकील मोईन ने अपना कलाम कुछ यूं कहा कि ‘एक तरफ़ ज़माना है, एक तरफ़ ज़रूरत है। इसके बाद भी दुनिया, कितनी ख़ूबसूरत है। उम्र बीत जायेगी मुझको आज़माने में, हम ही एक अनूठे हैं अब तलक ज़माने में। डा. अंजुम बाराबंकवी ने कलाम पेष करते हुए पढ़ा कि ‘शायद नए सफर की कहानी लिखेंगे लोग, पानी को खून खून को पानी लिखेंगे लोग। है आसमान हर्फ को फिर एतिबार दे, वर्ना हकीकतों को कहानी लिखेंगे लोग। कागज पे अब लहू की लकीरें भी आ गई, कब तक हमारे खून को पानी लिखेंगे लोग। वहीं लखनऊ से आए मोहम्मद अली ‘साहिल’ शायर फै़ज खुमार, डॉक्टर रेहान अलवी, बाराबंकवी ने भी अपने अपने कलाम पेष किये। इस मौके पर प्रमुख रूप से संयोजक राजनाथ शर्मा, मो. उमेर अहमद किदवई, हसमत उल्ला, कौषल किषोर त्रिपाठी, परवेज अहमद, तौकीर कर्रार, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, चौधरी लामान, कृष्ण कुमार द्विवेदी, जैदपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन रियाज अहमद, फरहत उल्ला किदवई, पाटेष्वरी प्रसाद, हुमायूं नईम खान, धनंजय शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।

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