आखिर अशोक गहलोत और गौतम अडानी की यह दोस्ती क्या गुल खिलाएगी। क्या गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान कांग्रेस मुक्त हो जाएगा?
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले गांधी परिवार को खुली चुनौती दे रखी है। हालात इतने खराब हैं कि गांधी परिवार के निर्देश पर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी नहीं हो पा रही है। समर्थक मंत्रियों और विधायकों का सार्वजनिक तौर पर कहना है कि अशोक गहलोत के अलावा कोई और मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं होगा। यह भी भ्रम फैला रखा है कि 106 विधायकों में से 102 अशोक गहलोत के साथ हैं। यानी पूरी कांग्रेस गहलोत की जेब में हैं। जब किसी पार्टी में राजनीतिक संकट होता है तो उद्योगपतियों की भूमिका बढ़ जाती है। विधायकों को एकजुट रखने में जो संसाधन चाहिए उन्हें उद्योगपति ही उपलब्ध कराते हैं। राजस्थान के ऐसे राजनीतिक माहौल में मुख्यमंत्री गहलोत देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी से जबरदस्त मित्रता दिखा रहे हैं। 7 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित इनवेस्ट समिट में गहलोत ने अडानी को अपना भाई बताया। मंच पर गहलोत और अडानी ने एक दूसरे की जमकर प्रशंसा की। गहलोत ने अपने अधिकृत फेसबुक पेज पर अडानी वाला फोटो भी पोस्ट किया। गहलोत ने अडानी के साथ मित्रता तब दिखाई है, जब 7 अक्टूबर को ही कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने गौतम अडानी की सम्पत्तियों को लेकर आपत्ति जताई है। राहुल का कहना रहा कि गौतम अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र हैं, इसलिए अडानी देश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। अडानी की सम्पत्तियों में रॉकेट के तरह वृद्धि हुई है। राहुल का कहना रहा कि मोदी अपने उद्योगपति मित्र को मालामाल कर रहे हैं। राहुल गांधी की प्रतिकूल टिप्पणी और अशोक गहलोत के प्रदर्शन से ही सवाल उठा है कि गहलोत और अडानी की यह दोस्ती क्या गुल खिलाएगी। राहुल की नजर में जब देश के प्रधानमंत्री को प्रभावित कर सकते हैं तब अडानी के लिए एक प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रभावित करना बहुत आसान है। सवाल यह भी है कि राजनीतिक संकट के बीच गहलोत, अडानी के साथ इतनी मित्रता क्यों दिखा रहे हैं। क्या यह राजस्थान को कांग्रेस मुक्त करने की कोई योजना है? एक उद्योगपति के नाते गौतम अडानी देश के किसी भी राज्य में निवेश कर सकते हैं। लेकिन ऐसा निवेश तभी संभव है जब संबंधित प्रदेश का मुख्यमंत्री किसी उद्योगपति को अपना भाई बताए। गौतम अडानी के बारे में राहुल गांधी चाहे कितनी भी प्रतिकूल टिप्पणी करें, लेकिन अशोक गहलोत ने अडानी को राजस्थान के विकास में महत्वपूर्ण व्यक्ति बताया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत के शासन में ही अडानी को सोलर पार्क लगाने के लिए सैकड़ों बीघा भूमि रियायती दर पर दी गई है। जयपुर का एयरपोर्ट भी अडानी की कंपनी के पास ही है। किसी भी राज्य में एयरपोर्ट का संचालन संबंधित राज्य सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
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