जहां-जहां श्रीराम कथा होती है, वहां-वहां भगवान शिव अपने नंदी एवं गणों के साथ कथा का श्रवण करते हैं।
शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705
मसौली बाराबंकी। जहां-जहां श्रीराम कथा होती है, वहां-वहां भगवान शिव अपने नंदी एवं गणों के साथ कथा का श्रवण करते हैं। कथा की सार्थकता दैनिक जीवन में आत्मसात करने से होती है। भगवान का स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय बनाकर कल्याण की कामना करनी चाहिए। अन्यथा कथा केवल कानों के मनोरंजन के रुप में ही रह जाती है। बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मन की शुद्धि होती है।
उक्त बातें कस्बा मसौली मोहल्ला कटरा में स्थिति शिव मन्दिर चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन रविवार अयोध्या से पधारी कथा वाचिका साध्वी सोनम शात्री’ ने भगवान शिव और पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा वाचिका ने शिव और पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि बरात में सबसे पहले वहां ब्रह्माजी आते हैं, तो नारद से पूछा जाता है कि क्या ये लड़की के पिता है, तो नारद जी कहते है कि ये लड़की के पिता नहीं हैं यह तो ब्रह्म पिता है। वहां विष्णुजी आते हैं, तो पूछा जाता है कि क्या ये दूल्हा है तो नारदजी कहते हैं कि नहीं दूल्हे तो पीछे आ रहे हैं। इसके बाद वहां वरुण देव आते हैं, तो नारद जी कहते है कि इनके पीछे शिव भगवान आ रहे हैं। शंकर भगवान नंदी पर सवार होकर आतेे है। गले में सर्प, मुंडो की माला, जटाओं में गंगा तथा सिर पर चंद्रमा विराजमान है। शिवजी का ऐसा रूप देखकर माता पार्वती की मा मैना डर जाती है तथा आरती का थाल छूट कर नीचे गिर जाता है। नारदजी कहते हैं कि भगवान कितने भोले हैं। आरती के थाल में रखा दीपक लज्जित होकर भगवान शिव के चरणों में गिर गया। शिव की सिर पर पहले से ही चंद्रमा विराजमान है। इस दौरान कथा वाचिका ने भगवान के 24 अवतारों के बारे में विस्तार से बखान किया इस मौके पर तमाम भक्त गढ़ मौजूद रहे।
शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

