भंडारे के साथ संपन्न हुई भागवत कथा

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। कस्बा मसौली के भुलीगज में सत्यनामी ब्रम्हयज्ञ गुरुग्रंथ श्रीमद् भागवत के अन्तिम दिन पूर्ण आहुति के साथ सम्पन्न हुआ। उसके बाद भव्य भण्डार का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाएं, पुरुष और बच्चों ने पुड़ी सब्जी खीर का प्रसाद ग्रहण किया।
कथा में व्यास पूर्णानन्द शरण दास जी ने कहा कि स्वामी जी ने हमें बताया की कलि काल में सिर्फ कशी का महातम है और काशी कोई और नहीं, हमारा जो शरीर है इसी में काशी है जहाँ पर मन इंद्री एकत्र होते हैं वही पर संगम कहलाता है और हमारे जो पाप हैं वही यमराज हैं ऐसा हमारे सतगुरु ने हमें बताया है और हमारा शरीर तब ही काशी कहलाएगा जब इसमें सुकर्म की गंगा बहेगी। जब त्रिकुटी पर हम स्थिर हो जाएं यही संगम है। ब्रह्मा और भक्ति और भजन देश का सम्पूर्ण ज्ञान कराते हुए स्वामी जी ने सप्तम दिवस को विराम दिया तत्पश्चात सवा दो लाख आहुतियों का जो संकल्प हुआ था आज पूर्णआहुति के साथ स्वामी जी की कृपा से संपन्न हुआ तत्पश्चात अभिजीत मुहूर्त में कन्या भोज प्रारम्भ करके विशाल भंडारे का आयोजन समस्त भक्त जानो द्वारा संपन्न हुआ। स्वामी जी के सतनामी ब्राह्मयज्ञ की के सम्पन्न के बाद पूर्ण आहुति दी गई। इसके बाद पुड़ी, सब्जी और खीर का भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें कस्बा मसौली, मसौली बाजार कटरा ज्योरी नौबस्ता बनियाचांदा देवलिया बड़ागांव, बांसा, धरौली,मुजापर,गुरेला, रहरामऊ,
धनकुट्टी, बसन्त पुर,देवकलिया सहित इलाके से महिलाएं, पुरुष और बच्चों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का आयोजन जगजीवन राम, पुष्पा देवी,शुभम,सत्यम आदि लोग थे।

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