गर्मी का पारा क्या चढ़ा तो गोला के विद्युत विभाग ने हथियार ही डाल दिए शायद विद्युत विभाग ने आत्म निर्भर होने का मतलब क्या समझा मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र का अर्थ अपने तरीके से निकाल लिया पंखा लो और आत्मनिर्भर हो जाओ हाथ वाले पंखे का इस्तेमाल करो विद्युत विभाग से कोई उम्मीद करना एक मजाक सा लगता है। अब इतना आत्मनिर्भर भी ना बनाओ साहब की आत्मनिर्भर होने का पैमाना ही बदल जाए। और जनता के सब्र का बांध टूट जाए और घर मे रह रहे लोग गर्मी से तड़प कर बाहर का रास्ता तलाशने लगे एक ओर जहां प्रशासन घर में रहने की अपील कर रहा है। तो विद्युत विभाग भी अपनी जिद पर अड़ा है बिना बोले कहना चाहता है कि दम हो तो घर में रहकर दिखाओ।
विद्युत विभाग की बेशर्मी का आलम यह है कि गोला व गोला से सटे ग्राम द्वारा बार-बार गुजारिश और मिन्नतें करने के बाद भी जब लाइट नहीं मिली तब जनता की अपील आखिर विद्युत उपभोक्ताओं को फोन करने पर अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा यही बताया जाता है कि सटडाउन है या फिर मेन सप्लाई नही है ।
पावर हाउस पर तैनात स्टाफ का मनमाना रवैया बना मुसीबत
एक तो आम जनमानस बिजली की जबरदस्त कटौती जैसी भारी समस्या से परेशान है वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा जारी किया हुआ सरकारी नंबर जो पावर हाउस पर रहता है शायद ही कभी मिल जाए और अगर मिल भी जाएगा तो कोई संतोषजनक उत्तर मिलने की संभावना तो लगभग ना के बराबर है सिर्फ एक दूसरे पर डालकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जाता है इस समस्या की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कई बार की गई लेकिन अस्वाशन के अलावा कुछ नही मिला तरीका अभी तक नहीं बदला।

