रसूखदारो की पहुंच के कारण मतदाता सूची से नाम गायब अंकुर यज्ञसेनी
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी। जनपद बाराबंकी से पचास किलोमीटर दूर टिकैतनगर से सटे विकास खण्ड पूरेडलई के खुटौली गाँव मे कुछ अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है पूरेडलई विकास खण्ड के ग्राम खुटौली में रसूखदारो के कारण मतदाता सूची से नाम ही बाहर कर दिया गया जबकि प्रदेश की योगी सरकार सबका साथ, सबका विकास के बड़े बड़े दावे करते नही थकतीं कि उन्हीं के टुटपुँजिया नेता पार्टी की लोटिया डूबाने में जुटे हैं जिससे क्षेत्र में कही न कही किरकिरी हो रही है। भारतीय इतिहास में ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम बढ़वाने के लिए किसी भी योग्य मतदाता को सम्बंधित उच्चाधिकारियों के आगे एड़ियां रगड़ने के अलावा उच्च न्यायालय की शरण लेना पड़ गया हो फिर भी इस भ्रष्टतंत्र,रसूखदारों के आगे इनकी एक न सुनी गई हो और आज भी मतदाता सूची में स्थान न दिया हो। जबकि इसके विपरीत चुनाव आयोग ने स्प्ष्ट निर्देश जारी किए है कि कोई भी नागरिक छह महीने से अधिक समय से किसी भी गाँव में निवास कर रहा हो तो उसे वहाँ का निवासी मान कर मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है किन्तु उसके इस स्थापित विधान का स्वयं निर्वाचन से जुड़े उसके कारिंदे ही नही मान रहे है। विगत तीन वर्षों से विकासखंड पूरेडलई की ग्राम पंचायत खुटौली में स्थाई रूप से अपना मकान बना कर रह रहे रामू रावत पुत्र राम लखन रावत का नाम तमाम कोशिशों के बाद भी ग्राम पंचायत की बनाई जा रही मतदाता सूची में जब शामिल नही किया गया तो उसे मजबूर होकर उच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाना पड़ गया। वहाँ से जिला निर्वाचन अधिकारी जो कि जिला मजिस्ट्रेट होते है व अन्य अधिकारियों को उचित कार्यवाही करने हेतु 18 जनवरी 2021 को निर्देशित किया गया था जिसके बाद भी इस आदेश को पाने व लगभग पंद्रह से अधिक साक्ष्यों को देने के बावजूद भी अभी तक उसका व उसकी पत्नी का नाम मतदाता सूची में शामिल नही किया जा सका जबकि भारत निर्वाचन आयोग की गाँव की पुनरीक्षित मतदाता सूची के भाग संख्या 155 अनुभाग संख्या 1 खुटौली विधान सभा दरियाबाद के क्रमांक 661 पर रामू रावत, 662 पर उसकी पत्नी अंजली देवी का नाम अंकित है उसका परिचय पत्र भी बना हुआ है जबकि दोनों लोगों के गाँव में बनाये गए राशनकार्ड में भी नाम हैं और वर्ष 2019 के जनवरी में बनाया गया आधार कार्ड, जाति, निवास, आय प्रमाण पत्रों की प्रमाणित प्रति परिवार रजिस्टर की प्रमाणित नकल आदि दर्जनों ऐसे प्रमाणित अभिलेख मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिये बराबर दिए जा रहे है जिसे सम्बन्धित जिम्मेदार देखने के बजाय दोनों आंखे बंद करके सूरदास बनकर बैठे है और रसूखदारों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं जिम्मेदारों की मिलीभगत से किसी एक को लाभ पहुंचाने के कृत्य को अंजाम देने में लगे हुए है। इस मामले के पीछे ग्राम प्रधानी को अपने पक्ष में बनाए रखने में जुटे वर्तमान प्रधान और उनके प्रतिनिधि इस युवक को इसलिये मतदाता सूची में शामिल नही होने देने के लिए सभी प्रकार के दावपेंच अपना रहे है ताकि वो निर्वाचन में भाग नही ले सके और नही तो 10 वर्षो से चली आ रही प्रधानी को शत प्रतिशत चले जाने की संभावना मानी जा रही है इसके लिये वो और उनके समर्थक पक्षकार को अरसंडा गाँव का बता कर मतदाता सूची में शामिल नही होने दे रहे है वही कुछ समय पहले अरसंडा और खुटौली दोनों को मिलाकर एक गांव सभा थी उस समय रामू रावत और उनका परिवार अरसंडा गांव के मूल निवासी थे मगर जब उस ग्राम सभा का विभाजन हुआ और दो ग्राम सभा बन गयी तो बाद में रामू रावत खुटौली गाँव मे पक्का घर बनाकर अपने परिवार समेत रहने लगे और अरसंडा में परिवार के शेष लोग रहने लगे जबकि रामू रावत की माँ 2020 तक अरसंडा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान रही हैं जबकि उनके द्वारा कराए गये विकास कार्य व जनकल्याण कार्य पूरे जनपद सहित तमाम जगहों पर प्रसिद्ध है उनकी लोकप्रियता अरसंडा,खुटौली गांव सहित तमाम ग्राम पंचायतों तक हैं जिनकी सेवा करने में ग्राम प्रधान ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जो आज भी प्रशंशनीय हैं यही कारण है कि रामू रावत व उसकी पत्नी का नाम खुटौली मे शामिल न होने देने के सभी दांवपेंच खेलकर तमाम प्रयास हो रहे है जाने अनजाने में इस कृत्य में शामिल जिम्मेदार लोगों द्वारा भी रामू रावत को न्याय नही दिया जा रहा है। यहाँ दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि ग्राम पंचायतों की निर्वाचन में बनने वाली मतदाता सूची के निर्माण में सत्तादल के प्रभावशाली नेताओ द्वारा बीएलओ की तैनाती से लेकर मतदाता कर्मियों की नियुक्ति तक मे जबरदस्त खेल खेला जा रहा है,सूत्रों की माने तो यही वजह है कि जिस दल की प्रदेश में सत्ता होती है उसी दल से सम्बंद6 ज्यादातर लोग चुनाव जीतकर आते है क्योंकि मतदान के दौरान भी उन्हें शासन सत्ता का विशेष संरक्षण प्राप्त होता चला आ रहा है यही वजह है कि सत्ता दल के लोग अपने आचरणों व कार्यो से कम शासन सत्ता के दुरूपयोग से चुनाव जीतने के सभी जुगत लगाने में कोई कोरकसर नही छोड़ते जिसमे सर्वाधिक महत्वपूर्ण मतदाता सूची से नाम को शामिल न होने देना या उसे कटवा देना है जिसके बाद में चिल्लाने से भी कुछ भी नही होता।आज भी अनेक गाँव मे बाहरी लोगों के नाम दर्ज कराए जाने की शिकायतें निरन्तर मिलती रहती है मगर उन पर प्रभावशाली कार्यवाही नही हो पाती।जिसका बेजा फायदा वे लोग न सिर्फ मतदान में उठाते है बल्कि बाद में सरकारी योजनाओं को भी हथियाने में करते है अब देखना यह है कि इस मामले में रामू रावत व उसकी पत्नी अंजली का नाम मतदाता सूची में शामिल करने से लेकर चुनाव सम्पन्न होने तक किस तरह का व्यवहार किया जाता है।
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

