किसी बड़े नसीले पदार्थ की तर्ज पर बिक रहा पान मसाला -मसाला कारोबारी छुटभइया नेताओं की शरण में

प्रधान संपादक आलीमा शमीम अंसारी

-पत्रकारों पर बनाया जा रहा है नाजायज दबाव

बाराबंकी। जनपद बाराबंकी का कुछ क्षेत्र मिनी दुबई के नाम से मशहूर था किन्तु अब पूरा जनपद पान मसाला की अवैध बिक्री के कारण ‘‘पुरे जनपद मिनी दुबई’’ के नाम से जाना जाने लगा है। शहर में आस-पास के जनपदों के कई व्यापारी सेटिंग बैठाकर देर रात बिरात आते हैं और चोरी-छिपे प्रतिबंधित पान मसाला लेकर जाते हैं। ना बालिग बच्चों से अपने मनमाने रेट 3 रूपया वाला कमला पसंद 15 रूपये में डायरेक्ट ग्राहकों को बड़े व्यापारियों उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में कई बड़े व्यापारी पान मसाला का कारोबार करते है, किन्तु जब से पान मसाला को प्रतिबंधित किया गया है तब से उक्त व्यापारी अपनी पहुंच का लाभ उठाते हुए माल को चैगुने दामों पर बेच रहे हैं। इस सम्बंध में जब एम0एम0 न्यूज 24 टाइम्स ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया है तब से जनपद के कई व्यापारी एकजुट होकर छुटभइया नेताओं की शरण में जाकर पत्रकारों पर ही दबाव बना रहे हंै, किन्तु छुटभइया नेता अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए उक्त कारोबारियों के सामने लम्बी-लम्बी ढींगे हाकते हुए कहते हैं कि तुम लोग परेशान न हो, हम अब पत्रकारों पर दबाव बनाकर खबरों को प्रकाशित नहीं होने देंगे।

हमारे संवाददाता से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई व्यापारी अब एकजुट होकर गोपनीय मीटिंग करके सीधे छुटभइया नेताओं की शरण में जाकर अपनी व्यथा सुना रहे हैं और कह रहे हैं कि आप ही हमारे नेता हैं, अब आप ही हम लोगों को पुलिस के छापे से बचाइए, हम पास बहुत माल डम्प है, अगर पुलिस ने कोई कार्यवाही कर दी तो उक्त सारा डम्प माल पकड़ा जायेगा, जिससे हम लोगों को बहुत नुकसान होगा, अगर समय से माल नहीं बेच पाये तो उक्त डम्प माल रखा-रखा लाल हो जायेगा।

शहर के साथ-साथ जनपद के कस्बा देवां, जैदपुर, सफदरगंज, फतेहपुर, सतरिख, हैदरगढ़, सिद्धौर, रामनगर, मसौली, बंकी आदि कस्बो में एम0आर0पी0 से चैगुने दामों पर मारफीन की तर्ज की पर माल सप्लाई हो रहा है। उक्त प्रतिबंधित पान मसाला कारोबारियों की ऊँची पहुंच व धनबल के कारण स्थानीय पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। कभी-कभी सिपाहियों द्वारा माल पकड़कर थाने पर लाया जाता है किन्तु थाने पर पहंुच कर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है, सिर्फ खानापूर्ति करके बड़ी व्यापारियों को छोड़ दिया जाता है।

प्रधान संपादक आलीमा शमीम अंसारी

Don`t copy text!