बाराबंकी। क्षेत्र के गौराचक गांव में चल रहे पांच दिवसीय भगवान बुद्ध की कथा के दूसरे दिन हरदोई से पधारे कथा व्यास विपिन राज ने प्रसंग सुनाते हुए कहा नेपाल की तराई में कपिलवस्तु नामक एक शहर था उसी शहर में सुद्दोधन नाम के एक राजा राज्य करते थे उनकी पत्नी का नाम महामाया था काफी समय बीत जाने के बाद महामाया को कोई संतान नहीं हुई महामाया ने महाराज से प्रार्थना की आप दूसरा विवाह कर ले रानी के हट के बाद महाराज विवश हो गए और रानी की बहन से विवाह रचा लिया विवाह के एक वर्ष उपरांत आषाढ़ माह की बुद्ध पूर्णिमा को महराज ने एक भव्य भंडारे का आयोजन किया जिस भंडारे में ऋषि-मुनियों सहित आसपास के क्षेत्र के सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया उसी रात स्वप्न में रानी महामाया को एक तारा टूटा हुआ दिखाई दिया और एक हाथी आया और सफेद पुष्प रानी की झोली में डाल दिया समय बीतता गया।लगभग नौ माह बीत गए रानी अपने मायके जा रही थी। रास्ते मे लुम्बनी के वन में भगवान बुध्द का जन्म हुआ। कपिलवस्तु में भगवान बुध्द के जन्म पर उत्सव मनाया गया श्रोता कथा का प्रसंग सुनकर भाव विभोर हो गए।
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी
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