आखिर मसौली को कब मिलेगा नगर पंचायत का दर्जा

एसएम न्यूज़24टाइम्स के जिला ब्यूरो के साथ मसौली संवाददाता अवधेश वर्मा शांती वर्मा की रिपोर्ट मोबाइल नंबर 8707331705

त्रिलोकपुर, बाराबंकी। स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. रफी अहमद किदवाई की जन्मस्थली ग्राम पंचायत मसौली को नगर पंचायत का दर्जा न मिलने में जनप्रतिनिधियों की पहल मुख्य कारण बना है। लगभग 20 हजार से अधिक आबादी वाले इस ग्राम पंचायत के निवासियों को तमाम सुविधाओ से वंचित रहना पड़ रहा है। बुद्धजीवियों एव कस्बेवासियों को नई सरकार में मसौली को नगर पंचायत का दर्जा मिलने की बड़ी आस है। राजनीतिक क्षेत्र में देखा जाय तो पूरे जिले में मसौली ग्राम पंचायत की भूमिका का अलग ही महत्व है। स्वतन्त्रता आंदोलन से लेकर आज तक की राजनीति में ग्राम पंचायत मसौली का अलग ही योगदान रहा है। फिरंगियों से देश को मुक्त कराने में ग्राम पंचायत मसौली के ही निवासी स्वतंत्रता आंदोलन की पहली पंक्ति के सेनानी स्व0 रफी अहमद किदवाई के साथ साथ एक दर्जन से अधिक रणबांकुरों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया।आजादी के बाद राजनीतिक क्षेत्र में रफी साहब के सक्रिय हो जाने से आज मसौली में जो भी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं वह सिर्फ रफी साहब की स्मृति में है बाकी गांव के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को नई पीढ़ी के लोग नही जानते है। आजाद भारत की राजनीतिक गलियारे में ग्राम पंचायत मसौली की हमेशा भागीदारी रही।रफी साहब देश की बड़ी पंचायत में कई विभागों के मंत्री रहे। रफी साहब के इंतक़ाल के बाद मिट्टी में आये देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने प्रिय नेता की याद में रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, महिला अस्पताल, डाकघर, बिजली उपकेंद्र सहित कई योजनाओं का उपहार दिया। इसके अलावा ग्राम पंचायत मसौली को विकास खण्ड मुख्यालय का दर्जा व रफी साहब की याद में इंटर कालेज सहित अन्य शैक्षिक संस्थानों का लाभ मिला। इन सभी सुविधाओं का वर्तमान समय में बुरा हाल है।

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