शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और रोजगार से ध्यान हटाने के लिए सरकारी सेवकों ने गिरवाया मस्जिद: मो0 उमर

मुकेश कुमार बाजपाई संवाददाता थाना क्षेत्र रामसनेहीघाट 8787223706

आदेश पारित करने वाले एसडीएम को हटाये जाने से आवाम में खुशी।

घटना में शामिल अन्य अधिकारियों के हाथ-पांव फूले।

बाराबंकी जिले के रामसनेही घाट में सौ साल पुरानी मस्जिद को मिसमार कर दिया गया। रामसनेही घाट की मस्जिद रात के अंधेरे में एसडीएम ने सरकारी अमले के जरिए बुलडोजर से तुड़वा दी। रामसनेही घाट की मस्जिद तुड़वाने में बाराबंकी के डीएम आदर्श सिंह और एसडीएम दिव्यांशु पटेल का जितना हाथ है तकरीबन उतना ही हाथ मुसलमानों के दरम्यान मसलकी मामलात का भी है। मस्जिद की तामीर तकरीबन सौ साल पहले हुई थी फिर जब वहां तहसील कायम हुई तो मस्जिद का नाम तहसील वाली मस्जिद पड़ गया। उक्त बात ग्राम रसूलपुर कला, पोस्ट अलियाबाद जिला बाराबंकी के निवासी युवा अधिवक्ता मो0 उमर मुख्तार ने जारी बयान में कही।

उन्होंने आगे बताया कि अब उसपर बरेलवी मसलक के लोगों ने नई कमेटी बनाकर सुन्नी वक्फ बोर्ड में गरीब नवाज मस्जिद के नाम पर इसका रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसी का फायदा उठाकर एसडीएम ने उसे तुड़वा दिया। जिला मजिस्ट्रेट आदर्श सिंह और एसडीएम दिव्यांशु पटेल मस्जिद तुड़वाने के लिए इतने उतावले थे कि उन्होने यह भी नहीं देखा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट पूरे उत्तर प्रदेश में इकत्तीस (31) मई तक किसी भी मजहबी इमारत को तोड़ने पर पाबंदी लगा रखी है। वैसे भी सरकार में ऐसा लगता है कि सरकार हर वह काम जरूर करेगी जिसे हाई कोर्ट ने रोका हो।

इस वक्त सरकार मुसलमानों और मसाजिद के साथ जो रवैया अख्तियार किए हुए है वह उनकी सियासी मजबूरी भी है। उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन आठ-नौ महीने में होने वाला है। अवाम के दरम्यान जाकर अपनी कामयाबियां बयान करने के लिए सरकार के पास कुछ नहीं है। कोविड-19 की बदइंतेजामियों ने उन्हें और भी पीछे कर दिया है। अब इतनी जल्दी कुछ हो भी नहीं सकता। इसीलिए परखा हुआ मुद्दा फिरकापरस्ती और हिन्दू मुस्लिम ही बचा है।

बाराबंकी जिला इंतजामिया के अफसरान की दलील है कि इस मस्जिद की मिलकियत के कागजात मस्जिद कमेटी के पास नहीं थे हमने उन्हें पूरा मौका दिया कि वह मस्जिद की जमीन की मिलकियत के कागजात पेश करके साबित करें कि मस्जिद सरकारी जमीन पर नाजायज कब्जा करके नहीं बनाई गई है। उनका यह दावा गलत है क्योकि यह मस्जिद 1968 से वक्फ बोर्ड में दर्ज है और 1959 में इसके लिए बिजली कनेक्शन के कागजात मौजूद हैं, अफसरान ने यह दलील भी नहीं मानी कि 1960 और 1990 में दो बार चकबंदी हुई तो दोनों बार बंदोबस्त में मस्जिद दर्ज है। दरअस्ल एसडीएम और डीएम दोनों ही तहसील वाली मस्जिद के बजाए मस्जिद गरीब नवाज के कागजात मांग रहे थे। यह नाम तो बाद में तब रखा गया जब मस्जिद बरेलवी मसलक के लोगों के जेरे इंतजाम आई और 2018 में वक्फ बोर्ड में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ इस लिए मस्जिद गरीब नवाज नाम के दस्तावेज मस्जिद कमेटी पेश नहीं कर पाई। एसडीएम भी इतने उतावले हो गए कि दिन में अपनी कोर्ट में बैठकर मस्जिद के खिलाफ फैसला दिया और रात के अंधेरे में चोरों की तरह अपने ही आर्डर पर अमल कराते हुए मस्जिद तोड़वा दी।

सब कुछ तयशुदा प्रोग्राम के मुताबिक ही हुआ एक तो मस्जिद तोड़वाई दूसरे कमेटी मेम्बरान और कुछ दीगर लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। चार-पांच लोग जो शायद यू-ट्यूब चैनल चलाते हैं वह लोग रामसनेही घाट जाकर टूटी हुई मस्जिद की तस्वीरें ले रहे थे। उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। मतलब साफ है कि डीएम आदर्श सिंह हो या एसडीएम दिव्याशु पटेल दोनों यह समझ कर काम कर रहे हैं कि अब कयामत तक प्रदेश में योगी की ही सरकार रहेगी उन्हे न तो अवाम खुसूसन मुसलमानों की कोई फिक्र है और न अदालतों का खौफ। उन्हें यह एहसास नहीं है कि अगर मुकदमा संजीदगी से चल गया तो उन्हें भी पूरी जिंदगी अदालतों के चक्कर लगाने में ही गुजर जाएगी।

मुकेश कुमार बाजपाई संवाददाता थाना क्षेत्र रामसनेहीघाट 8787223706

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