रहबरों ने नहीं सुनी तो पूरा गांव बन गया ‘दशरथ मांझी‘
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
बाराबंकी(एसएम न्युज24टाइम्स)। कई सालों से वोट लेकर वादे करने वाले नेताओं को यहां के एक गांव के लोगों ने अपने बुलंद हौसलों से आइना दिखाया है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जब नहीं सुनी तो पूरा गांव ‘दशरथ मांझी’ बन बैठा और भगहर झील पर अपनी मेहनत से पुल बनाने की कवायद शुरू कर दी है। जिले की रामनगर विधानसभा क्षेत्र के सूरतगंज विकासखण्ड में चैनपुरवा मजरे कजियापुर गांव के करीब भगहर झील स्थित है। इस झील की औसत लंबाई साढ़े तीन किलोमीटर और चौड़ाई ढाई सौ मीटर है। भगहर झील के उस पार चैनपुरवा स्थित है। यहां के ग्रामीण करीब छः किमी की दूरी तय करके अपने गांव पहुंचते है। सूरतगंज और महादेवा मार्ग से गांव की दूरी सिर्फ दो किमी ही है। ऐसे में लोग यहां नाव का सहारा लेकर सूरतगंज-महादेवा मार्ग पहुंच जाते है। कई सालों से लोग पुल बनाने की की मांग करते आ रहे थे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी नेताओं ने पुल के वायदे के नाम पर वोट ऐंठ लिये लेकिन वायदा पूरा नहीं किया। याद दिलाने पर भी जब कोई नतीजा नहीं निकला तो चैनपुरवा गांव के लोगों ने पंचायत बुलाई और खुद ही पुल बनाने का फैसला किया। फिर क्या था, औरतें हो या बच्चे, युवा हों या बुजुर्ग सब दशरथ मांझी की तरह जुट गये पुल बनाने में। अब गांव वालों का कहना है आने दो भइया चुनाव तब हम सब मिलकर सबक सिखाएंगे। ऐसे नेताओं को जो वादा भूल जाते हैं। इस पुल से चैनपुरवा, कजियापुर, पुरारीपुरवा, हलबालपुर व रैधारमऊ के लोगों को संजीवनी मिलेगी। इससे किसानों, छात्रों और लोगों को बड़ा फायदा होगा।
एसपी बदली थी गांव की सूरत
बताते चलें कि एक समय इस गांव के लोग कच्ची शराब के धंधे में पूर्णतया संलिप्त थे और आए दिन इस गांव में पुलिस छापा मारकर अवैध शराब के धंधे में संलिप्त लोगों को जेल भेजने का काम किया करती थी। दो वर्ष पूर्व बाराबंकी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ अरविंद चतुर्वेदी ने इस गांव को गोद ले लिया और इसके बाद इस गांव में शराब पूर्णतया बंद हो गई। इस दौरान महिलाएं भी काम करने से पीछे नहीं हटीं और पूरी तन्यमयता से साथ देने में लगी रहीं।
एसडीएम के आश्वासन पर ग्रामीणों ने रोका कार्य

ग्रामीणों द्वारा भगहर झील को पाटकर रास्ता की खबर से प्रशासनिक अमला हलकान हो गया। गुरूवार को खंड विकास अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की परंतु उनकी कोशिश नाकाम रही। इसके बाद रामनगर की एसडीएम तान्या दल बल के साथ मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से कुछ दिनों की मोहलत मांगते हुए उनकी सभी समस्याओं के निस्तारण का उन्हें आश्वासन दिया। काफी मान मनौव्वल के बाद ग्रामीण मान गए। ग्रामीणों ने कहा कि एसडीएम साहिबा यदि पुल न बनवा सको तो सिर्फ ह्यूम पाइप (डोंगा) की ही व्यवस्था करवा दीजिए। जिससे हम सभी ग्रामवासियों को आने जाने में सहूलियत हो सके। ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि अभी हाल ही कुछ बच्चे नाव से उतर रहे थे कि नाव डूब गई। गनीमत तो यह रही कि नाव में बैठे बच्चों को तैरना आता था जिससे उन सभी की जान बच गई। जबकि इससे पहले नदी में डूबने से अनेकों बच्चे, महिला व पुरुषों की जान जा चुकी है। जिस ओर शासन प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई जिससे यह प्रतीत होता है कि आम आदमी की जान की कोई कीमत ही नहीं है।
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500

