अली की मोहब्बत तक़वा और ईमान है – मौ.इब्ने अब्बास कामयाबी चाहिए तो ऐसे से मोहब्बत करो जो हर दौर में बे नुक़्स हो इल्म ,शजाअत और खिताबत के जौहर देखना है तो 13 रजब को दरे क़ाबा पर आओ

सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

बाराबंकी । अली की मोहब्बत तक़वा और ईमान है । कामयाबी चाहिए तो ऐसे से मोहब्बत करो जो हर दौर में बे नुक़्स हो । इल्म ,शजाअत और खिताबत के जौहर देखना है तो 13 रजब को दरे क़ाबा पर आओ ।रसूल के हाथों पर इंजील,तौरेत, जबूर के साथ साथ कुरआन की तिलावत तीन दिन के अली अ.की ज़बानी सुनो ।झूले में अजगर के किये दो टुकड़े।यह बातें जनपद से लगभग बीस किमी.दूर हैदर गढ़ रोड स्थित सराय इस्माईल की मस्जिद में जश्ने मौलूदे क़ाबा की महफ़िल को ख़िताब करते हुए ।आली जनाब मौलाना इब्ने अब्बास साहब ने कही ।उन्होंने यह भी कहा कि अली से अदावत कुफ़्रो निफ़ाक़ है। आखिर में मुल्क के लिए चैन अमन की दुआएं की । इससे पहलेनज़रानये अक़ीदत का सिलसिला चला उस्ताद शायरडा.रज़ा मौरानवी नेअपना कलाम पेश करते हुए पढा़ – मैं हूं मद्दाहे अली मेरी यह अजमत क्यों न हो ।अजमल किन्तूरी नेअपना कलाम पेश करते हुए पढा़ – अगर नादे अली जिब्रील पढ़ लेते तो मुमकिन था । शबे मेराज वह अपनी हदों से पार हो जाते ।डा.मुहिब रिज़वी नेअपना कलाम पेश करते हुए पढा़ – एक नूर है जमीन से ता हद्दे आसमां , जैसा सहर का रंग था वैसी ही शाम है। यह जश्न है खतीब ए सलून के जिक्र का ,ओठों पे आज रात खमोशी हराम है ।इसके अलावा कलीम आज़र बाराबंकवी, आरिज़ जरगावीं , हसन मेहदी एडवोकेट ,शारिब मेहदी ज़ैदपुरी, अहमद, मुजफ्फर इमाम ,सरवर अली करबलाई, हाफ़िज़ मुस्तकीम, सगीर लहर पुरी ,सफ़दर लखनवी, शजाअत अब्बास,ज़मानत अब्बास, हसन अब्बास बाराबंकवी, फ़िरासत अब्बास, सहीम व अली सादिक ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किये।महफ़िल का आग़ाज़ शारिब मेहदी ने तिलावते कलामे पाक से किया। निज़ामत के फ़रायज़ अपने बेहतरीन अंदाज में शजर बाराबंकवी नेअंजाम दिया।

सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

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